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कैसी अजब ये रात है !!

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Hindi Poetry
इंतज़ार .
रातो से सुबहों  तक का ,
और फिर किसी की आशा में रातो का .
ये रात भी बड़ी अजीब होती हे.
किसी के न  होने पर होने का और
होने पर न होने का एहसास रात कराती है.
एक पल में ज़िन्दगी के पन्नो को पलट कर रख देती हे  तो
दुसरे पल भविष्य का धुन्दला रास्ता दिखा देती हे .
विचारो को गतिशील पर,
काया को गतिहीन बना देती हे .
आँखों को आराम पर
दिलोदिमाग में हलचल मचा देती है  .
व्यक्ति चैन को तरसे फिर भी
चैन की अवस्था में ला देती हे .
यादो को चलचित्र,  पर,
वक़्त को बाँध देती हे .
भोर तक अपना होने का असर छोड़ जाती हे.
ये रात भी अजीब होती हे .

विपुल

7 Comments

  1. anuragjain says:

    “विचारो को गतिशील पर,
    काया को गतिहीन बना देती हे”
    वाह वाह ….good lines…

  2. siddha Nath Singh says:

    achchhi lagi.

  3. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर मनभावन लगी .
    कहने का खूबसूरत अंदाज़

    Welcome to p4poetry. Look forward to more from you and your active participation at site.
    Do please tell us something more about yourself by filling in your profile page.

  4. Raj says:

    I like the concept. Welcome Vipul.

  5. Harish Chandra Lohumi says:

    आवश्यकता है – रचना और रचनाकारों की जो धूम मचा दें,रंग जमा दें, दिन को रात और रात को दिन में तब्दील करने की क्षमता रखते हों और ” कैसी अजब ये रात है !! ” जैसी रचंनों को अंजाम दे सकें…

    हार्दिक बधाई !!!!

  6. prachi sandeep singla says:

    mujhe bahut hi pasand aayi,,welcm 2 p4 sir,,keep sharing 🙂

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