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जी करता है….

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Hindi Poetry

फैला कर बाहें, बिखरे हुए जज्बातों को समेट लूं,
जी करता है, तुम्हें अंग-अंग में लपेट लूं.

बदल दूं फाल्गुनी राग,नई मल्हार जगा दूं,
दिल की धुन में बहक-बहक कर,
तार-तार खनका दूं,

इस कदर हो जाऊं तुम पर न्यौछावर,
रग-रग में जंग भर दूं,
खुद रंग  जाऊं रंग तुम्हारे,
रोम-रोम तुमको रंग दूं.

***** हरीश चन्द्र लोहुमी

13 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर गहन
    उत्कट उत्कंठा का बयाँ
    बहुत मन भाया
    प्रशंसनीय.
    हार्दिक बधाई

  2. prachi sandeep singla says:

    itz simply simply soooooooooooo nice and touching,,cant explain but sure,,maja aa gaya 🙂

  3. Sanjay singh negi says:

    wahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
    wahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
    kya baat hai

  4. Raj says:

    सुन्दर गहरे भाव, हरीश जी.

    • H.C.Lohumi says:

      @Raj, घाव भी गहरे हैं सर. कमेन्ट के लिए शुक्रिया.

  5. kewala Nand Lohumi says:

    Kya bat hai.

  6. hrish says:

    lohumi ji where are u from

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