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दस मांगू तो…….

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Hindi Poetry

दस मांगू तो चार निकलते , तीन कहूँ तो दस
भाग्य हमारा ऐसा बिखरा ,रहा जंजीरें कस
भाग्य विधाता बड़ा मसखरा, नहीं टस से मस
वही  मिले जो लिखा विधि ने,जोर चले न वश

6 Comments

  1. Vishvnand says:

    अच्छा अंदाज़ अच्छी पंक्तिया

    “वही मिले जो लिखा विधि ने,जोर चले न वश”
    झेल न पाते बात ये सीधी, हरदम जाते फँस … 😉

  2. Harish Chandra Lohumi says:

    बहुत अच्छे स्वामी जी ,
    बधाई !!!!
    किसी के हिस्से में प्यास आयी ,
    किसी के हिस्से में जाम आया .

  3. THE LAST HINDU says:

    वही मिले जो लिखा विधि ने,जोर चले न वश
    वाह क्या बात है …

  4. prachi sandeep singla says:

    wah!

  5. thanks for your coments
    prachi

  6. Raj says:

    बहुत खूब, नीरज जी.

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