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दोहा -टिंचर का फोहा

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Hindi Poetry

दोहा -टिंचर का फोहा

टिंचर का फोहा लगा ,जलन से क्यूँ चिल्लाय
दवा घूँट कड़वा लगे,रोग दूर हो जाये १.

कह सुनकर तालीम दे,वो दोहा कहलाय
अनुभव हैं बड़े-बुजुर्ग के ,सीख हमें दे जाये. २.

पीहर आके बहन जब , भाभी चुगली खाय
स्वर्ग बना पीहर तभी , सासु नरक बनाय .३.

मद का प्याल ना समझ ,अँखियाँ शक्ति अपार
क्रोधन से देखन लगे ,भागे नशा खुमार . ४ .

रिश्वत लेकर धन लिया ,बिल्डिंग लीनी चिनाय
खड़ी ईमारत दंभ की , खुद ही चुगली खाय . ५ .

गोरा रंग निज देखके ,एक्टर बनने जाय
बिना हुनर का आर्टिस्ट ,जूठी प्लेट उठाय . ६ .

वृद्धाश्रम में बाप को, बेटा छोडन आये
रोये काहे देख क्रम , जब निज बेटा दोहराए ,७.

पकड़ के माथा बैठता ,किस्मत दोष बताय
छलनी में दूध दूहता ,दूध कहाँ रुक पाए , ८.

आव-भगत होती बड़ी ,गर दो दिन का मेहमान
गैर के घर लम्बा रुके,हो अपमानित इंसान .९ .

(पूर्व में ये दोहे रोमन में लिखे गए थे क्योंकि हिंदी फॉण्ट उपलब्ध नहीं था ,अब इन्हें देवनागरी में लिख कर प्रस्तुत कर रहा हूँ.)
——————————सी के गोस्वामी (जयपुर)

11 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत अच्छे बहुत खूब
    टिंचर का फोहा लगा , ठीक जगह मेरे भाय
    समझ गए वो बच गए ना समझे पछताय

  2. ashwini kumar goswami says:

    दोहों में १३:११ का अनुपात अनिवार्य है जिसे हर स्थान पर सम्यक कर लेने
    पर ही ये दोहावली उत्कृष्ट बन पायेगी ! लिखते तो सब रहते हैं किन्तु लेखन में
    नियमों का पालन करने वाले नगण्य ही दिखते हैं जिससे टिप्पणी करने अथवा
    अभिशंसा करने में हिचकिचाहट होती है ! स्पष्टवादिता हेतु क्षमा करें !

    • c.k.goswami says:

      @ashwini kumar goswami, दोहे का मुख्य उद्देश्य सीख और सन्देश देना होता है ,अगर वो इस उद्देश्य में सफल हो जाता है तो मात्रा और अनुपात की छोटी सी त्रुटि,अगर कहीं हो गयी हो, को नज़र- अंदाज किया जा सकता है.

  3. sushil sarna says:

    भावों को जब शब्दों में दिल से गूंथा जाय
    ओपचारिक त्रुटियों का फिर ध्यान न रह पाए
    मिर्ची खाय के जीभ पे सदा जलन हो जाए
    जानत हैं पर बारिश में मिर्ची को जी ललचाय
    खैर आपके ये दोहों के विभिन्न रंग अपनी एक अदा लिए हैं, पसंद आये- बधाई

    • c.k.goswami says:

      @sushil sarna,
      धन्यवाद् श्रीमानजी .

    • ashwini kumar goswami says:

      @sushil sarna, अपनी अपनी समझ है ! मेरी दृष्टि से जब उच्च श्रेणी के लेखकों या कवियों की रचनाओं में त्रुटियाँ होती हैं तो बात कुछ गले नहीं उतरती ! बिना मात्राओं और काव्य बोध को ध्यान में रखे हुए जब काव्य रचनाओं का लिखना जारी रहता हैं तो काव्य की आवश्यकता ही क्या है ? इससे तो बेहतर है गद्यात्मक विधि से ही सन्देश देना ! पाठक वर्ग में उच्च श्रेणी के ज्ञानी भी होते हैं और काव्य, जो एक ऐतिहासिक लेखन की श्रेणी में आता है, उसकी गरिमा के साथ साथ रचयिता का नाम भी जुड़ा होता है !

  4. Raj says:

    I liked the message behind the write-up.

    With respect to comment from Ashwini Ji, I would take it positive as he is putting it in considering Chandrakant Ji in high and mature category of poets, which itself is a milestone for many 🙂

    • c.k.goswami says:

      @Raj, आपकी प्रतिक्रिया का धन्यवाद.
      जहाँ तक अश्विनीजी की सलाह एवं सुझाव की बात है ,यह बात कहने में मैं कभी भी पीछे न हटूंगा की इस मंच में मुझे लाने का श्रेय उन्हें ही जाता है.अश्विनीजी के बताने पर ही मैं इस मंच से जुड़ा हूँ. उनका मार्ग दर्शन तो मिलता ही रहता है.अश्विनीजी ने मुझे uchch श्रेणी pradan kee iske liye मैं उनका aabhaari हूँ ..

  5. Sanjay singh negi says:

    mai kin lines ko point karu ki ye achii hai
    muje to hr ek doha achaa lag raha hai
    badai ho

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