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फिर से आई लहर समुंदर से.

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Hindi Poetry
फिर से आई लहर समुंदर से.
कुछ न लायी मगर समुंदर से. 
 
माहीगर लौट कर नहीं  आये
सिर्फ आई खबर समुंदर से.
 
प्यास से बेक़दर परीशां थे,
आये थे तर ब तर समुंदर से.
 
सारे ताजिर ज़मीन के निकले,
कौन लता गुहर समुंदर से.
 
रेत में जज़्ब हो गयी आके,
एक लहर रूठ कर समुंदर से.
 
लील जाये न ये घरोंदा भी
अब तो लगता है डर समुंदर से.

8 Comments

  1. rachana says:

    nice!

  2. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर, मनभावन
    हार्दिक बधाई …

    याद आ गयी हमें
    कितनी सारी यादें और बातें
    जो जुड़ी हैं हर बार समुन्दर से …

  3. U.M.Sahai says:

    रेत में जज़्ब हो गयी आके,
    एक लहर रूठ कर समुंदर से.
    ye sher bahut achchha laga.badhai S.N.

  4. Raj says:

    “रेत में जज़्ब हो गयी आके,
    एक लहर रूठ कर समुंदर से”
    — बहुत खूब.

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