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मोर मचाये शोर

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Hindi Poetry

मोर मचाये शोर

यहाँ  हर कवि  इक  मोर  है
जो अपनी खूबसूरत काव्य रचना पे इतराता है
खुद को सबसे श्रेष्ठ बतलाता है
मगर जब आलोचक उसे उसके पग दिखाता है
तो यह मोर शर्म से नज़रे झुकाता है.
पग की बदसूरती उसे टोकती  है खुद पे इतराने से
टीका   टिप्पणी उसे रोकती है गलतियाँ दोहराने से
———–सी के गोस्वामी (जयपुर)

14 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत अच्छे,
    रचना में बहुत अर्थ है और मोर का शोर भी ….

    मै तो कहूँ
    यहाँ मोर मचाये शोर कम
    पर मन में नाचे मोर ज्यादा है
    कविता कमेन्ट यहाँ पढ़ पढ़ कर
    सब चले गगन की ओर हैं ,
    समझ जो आये बात ये सब
    तब मन में नाचे मोर है …..

    • c.k.goswami says:

      @Vishvnand, हो सकता है कुछ दम्भी कवियों को ये रचना पसंद न आये किन्तु आप जैसे ऐसे कई स्पष्टवादिता स्वीकार करनेवाले सज्जन हैं जो इस सच्चाई को मेरी तरह स्वीकार करते हैं.मेरी कोई ये चाहे कमजोरी समझे या ध्रिस्टता पर मैं अपने मन में कुछ न रख कर जो,जैसा दिखलाई पड़ता है बयां कर देता हूँ .मुझे ख़ुशी होती है जब मेरी कलम से निकली सच्चाई को आप और राजजी से कई लोग स्वीकार करते हैं.आपको ह्रदय से धन्यवाद.

      • Vishvnand says:

        @c.k.goswami
        स्पष्टवादिता एक double edged weapon है
        हर स्पष्टवादी को अपना कहना स्पष्टवादी और सही ही लगता है पर वो सही तब है जब सुनने और पढ़ने वालों को भी वह एक स्पष्टवादी अवलोकन सा और सही लगे, criticism ही न लगे. स्पष्टवादिता और criticism के बीच बहुत fine line होती है इसीलिये ये काफी बार गलतफहमी का कारण भी होती है .
        इसी कारण किसी भी स्पष्टवादी को इसका भी बहुत ध्यान रखना होता है. क्या कहना है और कैसे कहना है.

        • c.k.goswami says:

          @Vishvnand, आपके विचार सर आँखों पर.मैंने यहाँ न तो किसी की आलोचना की है और नहीं किसी के बारे में कोई कडवी बात कही है .मैं यहाँ केवल व्यक्ति की मानवीय कमजोरी को ही उजागर करने का प्रयास कर रहा हूँ.हर व्यक्ति चाहे वो मैं स्वयं ही क्यूँ न होवूं,चाहता है कि उसकी हर काव्य कृति को प्रशंसा मिले ,किन्तु मैं यह भूल जाता हूँ कि मैं भी एक माटी का पुतला हूँ ,जिसमे भी कई कमियां हैं जिस प्रकार एक मोर में होती हैं जो देखने में कितना खुबसूरत लगता है किन्तु उपरवाले ने उसके पैर कि बनावट ऐसी की है कि वह उन्हें देख कर शर्मिंदा हो जाता है.
          अगर इस स्पष्टवादिता से आप सहमत नहीं हैं तो कोई बात नहीं ,मैं आपसे नहीं कहूँगा कि आप मेरे विचारों से सहमत हों,आपकी राय अपनी जगह सही हो सकती है. गत एक साल से आपके विचार देखने को मिल रहे है और इसके आधार पर इतना तो मैं अवश्य कह सकता हूँ कि आप न तो दम्भी हैं और न ही घमंडी.आप सदा सर्वहिताय बात करते हैं और सभी से अपेक्षा करते हैं कि इस मंच को कवी प्रेमियों का केंद्र ही बना रहने दे,मेरी कटाक्ष भरी लेखनी और
          स्पष्ट लेखन में अगर आप कुछ कमी अनुभव करते हैं तो अवश्य बताइए ,आपके सुझावों का स्वागत करूँगा.मैं उन व्यक्तियों में सम्मिलित नहीं हूँ जो आलोचना स्वीकार करने से घबराते हैं.मेरी कमियां उजागर होंगी तो आगे मेरे लिए ही सुधार करने में काम आएँगी. एक बार आपकी राय पर पुनः धन्यवाद.

          • Vishvnand says:

            @c.k.goswami ji
            बुरा मत मानिए.
            मेरा स्पष्टवादिता पर ऐसा स्पष्टीकरण आपके कमेन्ट की इन पंक्तियों के कारण था .
            “हो सकता है कुछ दम्भी कवियों को ये रचना पसंद न आये ”
            “मेरी कोई ये चाहे कमजोरी समझे या ध्रिस्टता पर मैं अपने मन में कुछ न रख कर जो,जैसा दिखलाई पड़ता है बयां कर देता हूँ ”
            वैसे और कुछ नहीं था और आपकी रचना के बारे में तो बिलकुल नहीं.

  2. Raj says:

    ये मोर मांगे ‘more’. चंद्रकांत जी, आपकी इसी स्पष्टवादिता के तो हम कायल हैं.

    • c.k.goswami says:

      @Raj,
      “आप हमारी स्पष्टवादिता के कायल हैं …..ऐसी स्पष्टवादिता हमने आपकी काव्य रचनाओं से ही सीखी है .धन्यवाद् इस कायलपन का.

  3. siddha Nath Singh says:

    क्या करियेगा , सभी यूँ मजबूर हैं –
    न कोई कद्रदां, ना प्रेस न टी वी.
    यूँ नाचे जंगलों में मोर काफी.
    सरो सामान था मुश्किल ही बचना,
    सफर में गठरियाँ कम, चोर काफी.

    • c.k.goswami says:

      @siddha Nath Singh, ‘
      ” शेरो-शायरी का खजाना रखनेवालों हो जाइये सावधान
      चोर उचक्के घूम रहे हैं,उठा ले जायेंगे आपका कीमती सामान
      चोर हैं ज्यादा और सामान है कम
      बचा लेना अपना खजाना अगर हो दम

      • Vishvnand says:

        @c.k.goswami
        अपना अपना ख्याल है जी,
        मेरे ख्याल से ये गलत है जी 🙂

        • c.k.goswami says:

          @Vishvnand, श्री एस एन सिंह एक उच्चस्तरीय शायर हैं और उनके पास शेरो-शायरी का खज़ाना है ,मेरा उनसे यही कहना है की सिंह साहब अपना खज़ाना संभाल कर रखना कहीं ऐसा न हो की कोई आपके खजाने से कीमती शेरो-शायरी चुरा ले –आज की तिथि में सिंह साहिब और सुशील सरनजी की उर्दू शायरी का कोई ज़वाब नहीं ,दोनों की रचनाएँ पढने में आनंद आता है. दोनों की शेरो शायरी का मुरीद हूँ मैं –किसी का मुरीद होना कहाँ गलत है.

          • Vishvnand says:

            @c.k.goswami
            आपने अब ठीक फरमाया इसीलिये मेरा भी ये ख्याल है जी
            ” आप जैसे शेरो-शायरी का खजाना रखनेवालों हो जाइये सावधान
            हम भी यहाँ सब पढ़ सीख पा लेंगे आप जैसों सा हुन्नर और सन्मान
            यहाँ सीखने वाले सब चोर से ज्यादा और उनके पास सामान है कम
            बचा लेना अपना खजाना और हुन्नर अगर हो सके आपमें दम
            पर घबराइये नहीं हम में भी सीखने का अभी तक कहाँ है इतना दम

  4. U.M.Sahai says:

    बहुत खूब गोस्वामी जी, आपकी अलग-अलग विषयों पर कवितायें और बेबाक टिप्पड़ियां पढ़ कर मज़ा आ जाता है. बधाई. ऐसे ही लिखते रहिये.

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