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सिकुड़ते रिश्ते

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Hindi Poetry


दीवारों के साथ  कमरों के संग
रिश्तों का आकार भी छोटा हो गया
न जाने इस संसार से
वो फला फूला प्यार कहाँ खो गया

नहीं चुका सकते हैं रिश्तों का भाड़ा
वो बूढ़े से माँ बाप कोने का कबाड़ा
ज़माने का दृष्टी असर हो गया
वो फला फूला प्यार कहाँ खो गया

वो नानी की परियां वो दादा की घोड़ी
वो माता का आँचल वो वो मीठी सी लोरी
न जाने क्यों माली जहर बो गया
वो फला फूला प्यार कहाँ खो गया

5 Comments

  1. chandan says:

    बहुत अच्छी लगी स्वामी जी

  2. prachi sandeep singla says:

    really nice nd welcm 2 p4 sir ji 🙂

  3. Raj says:

    Liked it.

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