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सीधी बात ….!

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Hindi Poetry

सीधी  बात ….!

(१)

यहाँ कभी न मन की प्यास बुझी,
प्यासे ही सब रह जाते हैं.
मरने के लिए जीते हैं सब,
फिर भी मर मर कर जीते हैं.

हम मर मर कर क्यूँ जीते है
और डर डर  कर ही  मरते हैं
नहीं समझ हमें  कुछ  आता है
ऐसा क्यूँ करते रहते हैं

बेचैनी है, हम सोचते हैं,
ऐसा जीना क्या जीना है,
गर मर मर कर यूं जीना है,
तो जीकर भी क्या करना है.

(२)
जग जीवन के जन्जालों मे,
ना समझ सका ख़ुद को मानव,
चिंताओं व्यर्थ व्यथाओं की,
गाथाओं मे खोया मानव.

कुछ ऐसे दीवानेपन में,
मेरे भी जीवन मे इक दिन,
जागा जीवन का अर्थ नया,
जब किस्मत से अनजाने मे,
“ख़ुद”को खोया, सबकुछ पाया……….!

(३)
यूं “खुद” खोकर  जब  “खुद” पाया
इस  “खुद” से  ही  कुछ ज्ञान हुआ
प्रभु  की  महिमा  का  स्पर्श  हुआ
प्रभुनाम  का  तारक  मन्त्र  मिला
खुशियों में जीवन बदल गया …

चिंताओं ने मुझको छोडा

(४)
अब जी जी कर ही जीना है
प्रभुप्रेम में जीवन जगना  है,
यहाँ खुशियाँ प्रेम लुटाना है
सत्कार्य ही करते जाना है
ना  मरने से घबराना है
जब मरना है तब मरना है…

सब छोड़ यहीं पर जाना है
इसका कुछ खेद न करना है
और दूर देश वो हो कोई
हमें  प्रभु के साथ ही जाना है ….
काहेका हमको डर कोई
प्रभु  का  ही  साथ  निभाना  है

(५)
हर  प्यास  हमारी  अब  सारी
प्रभू  नाम  से  ही  तो  मिटना  है
प्रभु  नाम  में  ज्ञान  छुपा  सारा
यह  सीधी  बात  समझना  है …

” विश्वनंद “

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6 Comments

  1. siddhanathsingh says:

    tvadeeyan vastu govind ! tubhyamev samarpaye ki bhavna ko svar deti kavita achchhi lagi,

  2. Raj says:

    सच में ही है ये सीधी बात.

    • Vishvnand says:

      @Raj
      आपका हार्दिक शुक्रिया. “सीधी बात” के लिए सच और सीधे कमेन्ट का…

  3. anupama says:

    this song is a like a journey. a journey of enlightenment, of self-realization. you have put it in such simpler way. i wish i could listen this song be sung by you one day.

    • Vishvnand says:

      @anupama
      Your comment is indeed very delighting and I feel thankful in gratitude for it has more than compensated for all my efforts of putting my feelings in this poem on the subject of my profound interest, pursuit and deep involvement.
      I am also very thankful for your suggestion. I too am wishing to render this poem in a song and hope I may be able to develop a tune for it in near future when I will let you know & post its podcast too.

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