« »

हवा का जवाब भी सही था…….

4 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 5
Loading...
Hindi Poetry
बेचैन सी हवा ने जब मुझे छुआ,,
मन भी बेचैन हो उठा,
और
मैंने की इल्तजा उससे,
ले जा उन तक तू मेरे अल्फाजों को,
और
अल्फाजों में गहरे तक गड़े एहसासों को,
 
हवा ने भी चुपके से हामी भरी,
और
उठा एक तेज झोंका उसी दिशा में,
जहाँ का पता मैंने दिया था,
इस ताकीद के साथ,
कि
उन्हें छूना तू कुछ इस तरह,
जैसे
पानी का गुब्बारा हो कोई………..
 
मेरे शब्द
उन्हें छूते ही फट जाएँ
और
भीग जायें वो उनमें भरे
एहसासों की मद्धम
पर फिर भी तेज बारिश में,,
 
और
मुझ तक भी लाना
इसी तरह से तू उनके पैगाम को,
 
फिर क्या था…..
 
आती जाती हवा बदन में
बस यूँ ही सिहरन मचाती रही,
और मैं प्रेम दीवानी हो
अपने पैरों के निशाँ हवा पे बनाती रही,
पर अखियों की दूरी
फिर भी दबी सांस सताती रही…..
 
काश हवा अपने हिंडोले में बैठाकर,
उतार भी  देती
मुझे मेरे कृष्ण के देस,
 
पर
हवा का जवाब भी सही था…….
कि
ये दूरी उसके सहारे से नहीं नपेगी,,
 
ये सफ़र तो
हमें अपने क़दमों से ही तय करना होगा,,
 
लहर दर लहर….
परत दर परत…..
 
अथक….अबाध……अविराम…..
 
तभी
जीवन की सुगंध और अस्तित्व के अर्थ को
सही मायनों में मायने मिलेंगे…!!!!
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

14 Comments

  1. rachana says:

    bahut sundar likha hai aapne, liked very much

  2. U.M.Sahai says:

    Ek betaab preysi ka apne priytam se milne ki adheerta ko darshati bahut sunder va jazbaati kavita, bahut badhai Prachi.

  3. Vishvnand says:

    एक बहुत खूबसूरत अंदाज़ की मनभावन रचना
    हार्दिक बधाई … Kudos

    शायद हवा ने जवाब में ये भी कहा हो कि Internet पर भरोसा मत करना … 🙂

  4. Harish Chandra Lohumi says:

    बहुत सुन्दर रचना प्राची जी,
    हवा को भी बाध्य का दिया आपने दूतिका बन केवल दो ही दिशाओं में आने-जाने के लिए….

    बधाई !!!!

  5. pabitraprem says:

    Deep, intensive feelings expressed beautyfully on a natural plain.

  6. Raj says:

    Simply beautiful, beyond my words of appreciation.

  7. parminder says:

    बहुत-बहुत सुन्दर! खो गयी इस प्रेम की हवा के झोंके में !

Leave a Reply