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***हुण आ गया सावन …(punjabi poem)***

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Punjabi Poetry
प्रिय पाठको, आपके सम्मुख एक बार फिर एक पंजाबी रचना प्रस्तुत करने का साहस कर रहा हूँ, उम्मीद है पसंद आयेगी
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अम्बराँ  विच चमकदी बिजली, देंदी सौ सौ वाजाँ 

हुण आ गया सावन ओ जोगी तूं घर आ जा

इक ताँ अग लगावन बूँदां दूजियाँ तेरियां यादाँ

 हुण आ गया सावन ओ जोगी तूं घर आ जा
  
मेनू नींद न आवे, सारी रात सतावे
मैं होके भरदी, तैनू तरस न आवे
झूठे सारे संदेसे तेरे, कैंदियाँ मेरियां बावाँ
हुण आ गया सावन ओ जोगी तूं घर आ जा
हुण आ गया सावन ओ जोगी तूं घर आ जा…..
  
मेरी पीड़ न जाने, करे सौ बहाने
नैणां नूँ दे गया, ह्न्जुँआँ दे गेणे
गिलियां रावां ते मैं चल के रांझे नूँ बुलावां
हुण आ गया सावन ओ जोगी तूं घर आ जा
हुण आ गया सावन ओ जोगी तूं घर आ जा…..
 
 
सुशील सरना

9 Comments

  1. renu rakheja says:

    Lovely ! Enjoyed reading

  2. Raj says:

    बहुत सुन्दर सुशील जी,

  3. Vishvnand says:

    पंजाबी है, पढ़ तो लिया,
    कुछ कुछ समझ भी आया,
    पूरा न समझ पाया,
    फिर भी “क्या बात है”
    “बड़ा मज़ा आया” .
    दिल ने जरूर फ़र्माया…

    • sushil sarna says:

      @Vishvnand,
      इस सुंदर और मनभावन प्रतिक्रिया का हार्दिक शुक्रिया-मैं कोशिश करूंगा इसको हिन्दी में भेजने की- फिर भी आपने इस भाषा को समझ कर अपनी प्रतिक्रिया भेजी,
      शुक्रिया सर जी

  4. parminder says:

    Very nice Sarna ji! This reads like a song, very lyrical. Why don’t you podcast it? बड़ा मज़ा आया जी एह गीत पढके!

    • sushil sarna says:

      @parminder,
      आपकी इस मनभावन प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद परमिन्द्र जी, बस मैं पोडकास्ट में अटका हूँ जल्दी ही ये फरमाईश भी पूरी करूंगा धन्वाद

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