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jindgi ke geet ga

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Hindi Poetry

जिन्दगी के गीत गा

छोड़ कर सारे झमेले जिन्दगी के गीत गा

दीप आशा का जला तू जिंदगी के गीत गा

गर डगर काँटों भरी हो चाहे हो ऊँची डगर

मत समझ खुद को अकेला रह तो चल के दिखा

पीछे होगा काफिला तू जिन्दगी के गीत गा

साथ तेरे चलने का संकल्प कुछ ही लें मगर

है पहाड़ी हौसला तो सामने तेरी डगर

मंजिली होंगे निशान तू जिन्दगी के गीत गा

तोड़ कर पत्थर का सीना गीत झरना गा रहा

उस अमावसी रात में ज्यों दीपक जलता जा रहा

लौ जला उस रात में तू जिन्दगी के गीत गा

ले लिया संकल्प तुमने रह में कुछ कर गुजर

न परेशां हौसले हो न फिरे हम दर बदर

अर्थ जीने का बना तू जिन्दगी के गीत गा.

2 Comments

  1. siddha Nath Singh says:

    अच्छी कविता परन्तु वाक्यों का अनगढ़पन खलता है.

  2. Vishvnand says:

    रचना के भाव और अंदाज़ सुन्दर हैं
    रह नहीं राह होना चाहिए, ऐसी कुछ त्रुटियाँ सुधारने की और रचना में refinement की जरूरत सी लगती है .

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