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Neta ji ki Aarti

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Hindi Poetry

नेता जी की आरती
जय खद्दरधारी देवा जय खद्दरधारी
पांच बरस सूं आवे जनता री बारी
बोलो जय खद्दरधारी

छल फरेब मक्कारी रग रग में भर दो
धंधो लोग करे ना थां वरगा कर दो
बोलो जय खद्दरधारी

लाज शर्म रो नातो दूर दूर ना हो
झूठा वादा करना सबने सिखला दो
बोलो जय खद्दरधारी

झूठी रोवे जनता थे ध्यान मति धरज्यो
एक काम नित करज्यो थांरो घर भरज्यो
बोलो जय खद्दरधारी

मांगन री या आदत छूट नहीं जावे
भोली भाली जनता चकरी चढ़ जावे
बोलो जय खद्दरधारी

घोटालो री किस्मत देवा थां सूं ही चाले
पूरो देश बेचलो थाने कुण पाले
बोलो जय खद्दरधारी

निरा निशरमा नीयत साफ नहीं लागे
वोटां सूं इण खातिर हेत घनो जागे
बोलो जय खद्दरधारी

है कवण री खातिर जनता री सेवा
जन जन भूख सूं व्याकुल थे खावो मेवा
बोलो जय खद्दरधारी

अजब हाजमो थारो सब कुछ खा जावो
चारो, गोबर, टोपन थे गटका जावो
बोलो जय खद्दरधारी

जो कोई आरती थांरी नित उठ के गावे
अगले सात जनम तक रोटी न पावे
बोलो जय खद्दरधारी

मेरा भारत महान

3 Comments

  1. siddhanathsingh says:

    achchha prayas, vyangya ubhar kar aaya.

  2. Vishvnand says:

    bahut achchaa sa ye kataaksh aur achchii vyang rachanaa see prateet huii
    yah mool bhaashaa kaunsee hai.
    Hardik badhaaii &
    Hearty Welcome to p4poetry
    Please do also fill in your profile page suitably which is presently blank.

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    दोहा- खद्दर वालो वेश में, छुप-छुप करत हलाल ,
    नोच-नोच जनता चल्यो, नेता जैसी चाल .

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