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उदास यादों के झुरमुटों में वो झिलमिलाता शमा सा चेहरा .

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Hindi Poetry
उदास यादों के झुरमुटों में वो झिलमिलाता शमा सा चेहरा .
सफ़र   के दर्दो थकन की खातिर सुकून परवर अमां सा चेहरा.   (sukoon parvar amaan-shantiprad sharan)
 
मिटा न अब तक भी है ज़हन  से , न वक़्त का कुछ असर हुआ है ,
वो वक्ते  रुखसत  हथेलियों  में झिझकता  छुपता  जमा  सा चेहरा.
 
न खोज   पाए  हदें  हैं  जिसकी  उड़े  जो  ताईर  तसव्वुरों  के,   (ताईर-पक्षी)
शरीर आँखों की कहकशां पर बिछा हुआ आसमां सा चेहरा.
 
वो कैफियत है अजीब तारी हरेक दिल में है जंग ज़ारी,
खिंची हैं तीरों सी उंगलियाँ और  तना हुआ है कमां सा चेहरा .
 
लबों  पे  ठहरी  हुई  खामोशी  पलक  पलक  में गुनाह्पोशी ,
जो चाँद जैसा दमक रहा  था हुआ है काली  अमा सा चेहरा.  (अमा-अमावस्या)

 

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4 Comments

  1. prachi sandeep singla says:

    achchi lagi 🙂

  2. U.M.Sahai says:

    good one.

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