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खो गए दम ब दम आदमी

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Hindi Poetry

खो गए दम ब दम आदमी

मोतबर मोहतरम आदमी.

भीड़ थी बेतहाशा मगर

सिर्फ उसमे थे कम आदमी.

वो  लुहार  एक  बस  चोट  दे ,

सब  बनें  एकदम  आदमी.

ऐसे  बर्ताव  अच्छे   हैं   क्या  ,

हम   भी   ठहरे   सनम   आदमी.

क्यों  औ ‘   कैसे  हुआ  सोचिये

बन  गया  खुद  जो  बम  आदमी.

मिलिए  मायूस    होंगे   नहीं  ,

वो  है  गरमागरम  आदमी

एहतराम आदमीयत  का  हो

तब  तो  हैं  आप  हम  आदमी

उनको  इंसान   कैसे  कहें  

जो  करें  सर  कलम  आदमी.

जो  मिले  उससे , कहता  फिरे

है  वो  ऊंची  रक़म  आदमी.

2 Comments

  1. chandan says:

    कमाल लिखते हो जनाब

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