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तो गलत होगा न,, इसके लिए किसी और से शिकायत गर करें..!!

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Hindi Poetry
आ गयी ज़िन्दगी की असलियत एक पल में नज़र के सामने,
जब टूटे सपनों  की कलम से भरने ज़िन्दगी के पन्ने  हम  चले…!!
 
रुकने की फुर्सत जब एक पल के लिए भी  देती नहीं ज़िन्दगी,
तो भागती राहों पर पैर टिकाते कभी पैर दौड़ाते कैसे बन पड़े..!!
 
अपने ही समय से अपने लिए ही वक़्त चुराना लगता है नासाज,
पुकारें आने लगती है गर एक पल भी  खुद से बतियाने हम लगे..!!
 
ज़िन्दगी की ऐसी  शक्लो- सूरत  भी तो पर हम ही लोग चुनते हैं,
तो गलत होगा न,, इसके लिए किसी और से शिकायत गर करें..!!
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

14 Comments

  1. हरीश चन्द्र लोहुमी says:

    अच्छी लगी !!!!

  2. siddhanathsingh says:

    saargarbhit aur shandaar.

  3. kishan says:

    nice one prachiji!@!

  4. U.M.Sahai says:

    ज़िन्दगी की ऐसी शक्लो- सूरत भी तो पर हम ही लोग चुनते हैं,
    तो गलत होगा न,, इसके लिए किसी और से शिकायत गर करें..!!

    ये पंक्तियाँ, प्राची, वाकई बहुत ही सुंदर और दिल को छूने वाली हैं, बहुत बधाई.

  5. rajdeep says:

    loved it dear

  6. Ramta Gur Singh says:

    Hakkit Achhi Kahi

  7. nitin_shukla14 says:

    यह गलत होगा अगर आप यह कहें, कि आप लिख नहीं सकतीं

    किसी चेहरे की मुस्कराहट, किसीके गम पढ़ नहीं सकतीं

    बाखुदा यह लेखनी का हुनर आपका कायल है

    खूब लिखतीं हैं आप, हर शख्श घायल है

    to galat hoga na…….

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