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*****वो लम्हा याद आया !!!!!!!!

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Hindi Poetry

चाँदनी रात को देखकर तेरे साथ बिताया हूवा
वो लम्हा याद आया !!!!!!
**********************************
सितारों से टमटमती वो रौशनी
दिये का धीरे से जलना
फूलो ज़ेसा शीश महेल का होना
हवा मैं प्यार के रंग मिलना
प्यार भरे नयन तेरे शर्माना
मेरे नादान मन का बहक जाना
भीनी खुशबू तेरा बदन लगना
सुहाग रात थी तेरा घूँघट हटाना
मेरे चाँद को देखकर चाँद का छूप जाना !!!!!!!!!!

“किशन”

6 Comments

  1. Vishvnand says:

    कब तक सहना पडेगा आपका हिंदी में गलती करना
    और इस कारण आपकी कविता का standard अनुचित होना ….
    कृपया पोस्ट करने के पहले किसी हिन्दी ज्ञाता को दिखाना ….

    • kishan says:

      @Vishvnand, sir aap ka sukriya me hindi me sudhar laake rahunga kyunki me gujarati hone ki vajah se bhaut galtiya ho jaati he lekin me ab sidhnath ji ki likhi sub gazale padhkar hi meri panktiya post karunga!!!!!..aap ka aabhar guruvar..bus aap ki yahi mahanata he aap ki vajah se hum achi panktiya likh sakte he aap ne ye tippni ki hume acha laga …aap ke guru charno me kishan ka pranaam..jay shree krishna

  2. dp says:

    कहना क्या चाहते हो किशन भाई,
    साफ़-साफ़ बताओ ना, हम किसी से नहीं कहेंगे….

    थोड़ा हिन्दी को सुधार लो मेरे भाई, हिंदी समाचार पात्र पढो और दो पन्ने अवश्य रोज लिखो. बांकी तो इस मंच से जुड़े हुए लोग हैं ही… सब ठीक हो जाएगा मेरे भाई…डोन्ट वरी.
    और हाँ एक बात तो माननी पड़ेगी मेरे भाई, तुम इस मंच के लोगों के लाड़ले बन चुके हो.
    बस भाषा सुधार लो तो मज़ा ही आ जाए.

    • kishan says:

      @dp, thnks mere bade bhai hum kya kahe..gujrati hone ke vaste meri hindi me bahut galtiya ho jati he….per aub nahi hone dunga ……jay shree krishna…aap ki tippni ke liye dil se sukriya

      • chandan says:

        भाई मेरे अब हर बात का एक ही जवाब “मैं गुजराती हुं” भी पकाऊ हो गया है मैदान में उतर कर जुकाम का बहाना नहीं चलेगा. थोड़ी कोशिश करो, तेजी से कविताओं की संख्या ना बढ़ाओ, शाब्दिक अशुद्धियां कम करो. तेज चलिए लेकिन चाल में शाइस्तगी भी होना जरूरी है. गुस्ताखी माफ़ करना.

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