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ख्वाब भी मर कर तारा बनते हैं..!!

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Hindi Poetry
अक्सर देखा होगा तुमने भी,,
सभी देखते हैं..
 
एकटक आसमां की ओर,
तारों के दरमियाँ,
जब कोई अपना चला जाता है,
हमेशा हमेशा के लिए,
इस दुनिया से दूर,,
 
लेकर  बैठ जाते हैं न हम,
अपनी यादों से भरे कटोरे को,
उड़ेलते है धीरे धीरे
एक अर्घ्य के जैसे
उसे अपने आंसूओं में…
ताकते हुए आसमां की ओर
क्योंकि
दूसरी दुनिया तो आसमां में बसती है ना..!!
 
पर क्या कभी गौर किया है..?
 
वो लोग क्या ढूंढ़ते होगे
अनंत आकाश में,
जिन्होंने साक्षात्कार नहीं किया अभी तक
जीवन की इस अंतिम सच्चाई का,
किसी अपने के लिए,
 
क्या ढूंढते होंगे वो….!!!!!
 
शायद अपने ख्वाब………
 
टूटे ख्वाब,
अधूरी अभिलाषाएं,
बिलखते अरमान,,
 
हाँ,,यही  तलाशते होंगे,,
 
 
क्योंकि शायद,
सिर्फ लोग ही नहीं,,
ख्वाब भी मर कर तारा बनते हैं..!!
 
आखिर  ख्वाबों का मरना भी तो जीवन की अमिट सच्चाइयों में से एक है…!!
 
 
 
 
 
 
 

10 Comments

  1. Tushar Mandge says:

    prachi ji nice poem…nice thougth

  2. dr. ved vyathit says:

    अति सुंदर भाव को व्यक्त करती रचना
    इस रचना का उत्तरार्द्ध बहुत सटीक बोध गम्य रहा निरंतर लखती रहें
    शुभकामनायें

    • prachi says:

      @dr. ved vyathit, बहुत बहुत शुक्रिया सर जी 🙂 आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया पाकर मन गदगद हो गया 🙂

  3. Vishvnand says:

    सुन्दर संकल्पना और रचना
    अंदाज़ ए बयाँ भी खूबसूरत
    मनभावन. हार्दिक बधाई

    • prachi says:

      @Vishvnand, बहुत बहुत शुक्रिया सर जी,, आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया पाकर मन गदगद हो गया 🙂

  4. nitin_shukla14 says:

    Nice Poetry Prachi……

  5. rajdeep says:

    wow………..

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