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तुम्हारा क्या है…?”

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Hindi Poetry
याद है तुम्हें,
कैसे खीज जाती थी मैं,
 
तुम्हारी उटपटांग शरारतों पे,
मुझे तंग करने की तुम्हारी चालाकी  भरी  कोशिशों पे,
जिनमे सफल हो ही जाते थे तुम हर बार, 
और मेरे चिढ जाने पर कहते थे,
”तुम्हें चिढाने में बड़ा मजा आता है…!!
 
और मैं खीज कर कह उठती थी,
”ऐसा भी कोई करता है भला?”
 
और तुम बड़े मजे से कहते थे,
”मैं करता हूँ ना”!!
 
और मैं कहती थी,,”तुम तो ‘बुद्धू’ हो,,तुम्हारा क्या है…?”
 
कैसे तुम मेरा हाथ पकड़कर,
अपने पास खींचकर  धीरे से
मेरे कान में कहते थे,
”मेरी तुम हो”….
 
बाखुदा.! एक गुमान आ जाता था खुद पर…..
 
और फिर तो अक्सर
तुम्हारी किसी भी बात पे,
बिना चिढ़े,,
पर दिखाकर कि मुझे चिढ हो रही है….
कह दिया करती थी मैं,
”तुम्हारा क्या है”?
जवाब में बस वो लफ्ज़  सुनने के लिए…..
उस गुरूर को महसूस करने के लिए…..
 
और अब
जब तुम आस पास नहीं हो,
दूर दूर तक नहीं हो,
तुम्हारे न होने के एहसास पर ही
खीज जाती हूँ मैं,
और आदत के मुताबिक कह जाती हूँ,
”ऐसा कोई करता है भला,,”
”मैं करता हूँ ना”,,,सुने बिना ही
कहती हूँ पिघल कर,
”तुम तो बुद्धू हो,तुम्हारा क्या है?”
 
कि शायद
किसी दिशा से तो जवाब आएगा,
तुम फिर से मेरे पास आकर
मेरे कान में हौले से कहोगे,” मेरी तुम हो…”
 
आ जाओ ना एक बार प्लीज़..
कह दो ना फिर से….
 
बाखुदा.! खुद पे गुरूर करने की आज बड़ी चाह हो रही है…!!
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

22 Comments

  1. siddhanathsingh says:

    sumadhur kavita nirala andaaz, door door tak paas n hone ka adbhut ahsaas kaise gul khilata hai, saakshaat prakat hua.

  2. Vikash says:

    बहुत सुन्दर.

    • prachi says:

      @Vikash, बहुत बहुत शुक्रिया विकाश,,तुम्हारा कमेन्ट आता है तो अच्छा लगता है…तुम्हारी कवितायेँ अपने आप में एक दुनिया होती हैं. 🙂

  3. sushil sarna says:

    अनुपम, अतुलनीय, अपने में भावनाओं का सैलाब समेटे अद्भुत रचना-प्राची मेरे पास प्रशंसा के लिए शब्द कम पड़ गए हैं मेरी और से बहुत बहुत बधाईईईईईईईईई

  4. pallawi says:

    bohut bhavanatmat ,bohut achcha warnan ,dono situation me sabdon ka corealation bohut achcha laga !!

  5. dr. ved vyathit says:

    आस के पंछी आयेंगे
    वो फिर सब दोहराएंगे
    बस कान खोल कर तुम रखना
    कलरव की तान सुनायेंगे
    वंशी होगी और वट होगा
    यमुना मैया का तट होगा
    मोहन फिर तुम्हे मनाएंगे
    वंशी की तान सुनायेंगे
    बहुत २ बधाई

  6. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर भावनिक प्यार की रचना
    ह्रदय तटोलेगी ये तो स्वाभाविक है होना
    इस अति सुन्दर रचना के लिए अभिनन्दन स्वीकारना
    ” तुम्हारा क्या है ” इसमें कितनी सारी छिपी हैं भावना ……

  7. ANUJ SRIVASTAVA says:

    nice one…

  8. rajdeep says:

    liked the way u rite
    loved it

  9. nitin_shukla14 says:

    Prachi, lovely description…..

  10. neeraj guru says:

    बाखुदा,बयां अच्छा है.भाव भी अच्छा है,पर लय नहीं है जो किसी भी कविता का ज़रूरी अंग है.

  11. U.M.Sahai says:

    वाह क्या बात है, प्राची, दिल की भावनाओं को दर्शाती व दिल को छूती एक अद्वितीय कविता, मेरी ओर से हार्दिक बधाई.

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