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नाम

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Hindi Poetry
जो चली गयी,,
उसी का नाम तो ज़िन्दगी था,
 
जो बाकी है,,
उसका नाम तो चंद साँसों के सिवा 
कुछ भी नहीं…!! 
 
 

18 Comments

  1. Harish Chandra Lohumi says:

    प्राची जी, एक बात बताइये-
    बिना सास के तो जिन्दगी चल सकती है लेकिन बिना साँसों के जिन्दगी कब से चलने लगी ?

  2. Vishvnand says:

    अच्छा अंदाज़,
    एक द्रष्टिकोण या समझ
    जो negative हो पर poetic है
    कोई low mood में उभरी है
    बधाई

    पर positive द्रष्टिकोण ज्यादा पसंदीदा है और उपयुक्त भी

    जो चली गयी,
    उसी को जिन्दगी क्यूँ नाम देते हो,

    जो बाकी है,,
    उसका नाम भी जिन्दगी है
    चाहे चंद साँसों की हो
    मज़े में गुजारो ll

    मेरी एक कविता ” सुकून” की दो लाइनें याद आ गयीं
    ” वख्त जो गुजर गया है उसकी न परवाह है
    हाथ में समय बचा है पल पल उससे प्यार है.”

    • prachi says:

      @Vishvnand, it has nt been written in a low mood,,i wud like 2 specify dat… one need not 2 guess about d writer’s mood in particlar,,itz d poem which z speaking wch z an imagery by me..it may b negativ but yes,one shud be optimistic in life,,i would frankly say dat..but thanx 4 ur valuable comment…stay connected 🙂

      • Vishvnand says:

        @prachi
        Readers interpret the mood of the poem for the poem reflects its own mood. It is not necessary that it is the mood of the author and it is also likely that the reader can misinterpret the mood of the poem but the comment of the reader will be on the basis of how the reader understands the poem and not on how and with what understanding the author has written the poem. Therefore a readers’ understanding of the poem can be much different from that of the author of the poem and that is the beauty of the whole phenomenon…

  3. siddhanathsingh says:

    मेरी राय में तो
    ज़िन्दगी सांसों के हुजूम में न लम्हों के मजमुए में है,
    वह तो हमारे आपके दिल में है, अहसास में है I
    शीशा हमें वही दिखाता है जो हम देखना चाहें-
    कि पानी आधा भरा है या आधा ख़ाली गिलास में है

    • prachi says:

      @siddhanathsingh, well said sir,,thanx 4 d beautiful comment…मेरी लिखी पंक्तियों के मर्म को समझने के लिए सादर आभार 🙂

  4. sushil sarna says:

    रचना जी, जिन्दगी को हर शख्स अपने नजरिये से देखता है
    किसी के लिए जो गुजर गयी वो जिन्दगी थी और किसी के
    लिए वर्तमान जिन्दगी है-हम शायद हालातों को जिन्दगी
    समझ बैठते है हम पल पल बदलते जिन्दगी के रंगों का
    क्या अंदाजा लगा सकते हैं कल वो हमारी आँखों को अच्छे
    लगते थे इसलिए वो पल जिन्दगी थे फिर आज हवा का थोडा
    सा रुख बदलते ही जिन्दगी सिर्फ साँसों का नाम हो गया-नहीं,
    हर सांस में जिन्दगी है और रहेगी जैसे ही कोई महक साँसों के
    द्वार खटखटाएगी जिन्दगी फिर मुस्कायेगी – रचना जी रचना आपकी
    बावजूद इस मंथन के सुंदर लगी, दिल में कहीं स्पर्श करती हैं
    आपकी चंद पंक्तियाँ -बधाई

  5. rajdeep says:

    its true
    i liked it………….

  6. kishan says:

    जो बाकी है,,
    उसका नाम तो चंद साँसों के सिवा
    ज़िन्दगी हैं ..और रहेगी क्यूंकि ज़िन्दगी तबतक रहेती हैं जब तक हम मृत्यु के आधीन नहीं हो जाते……प्राचीजी आप की रचना सत्य हैं,,,,जय श्री कृष्ण

  7. pallawi says:

    oh aage ki zindagi chand sanso k siva kuch bhi nahi !!
    liked it!!

    • prachi says:

      @pallawi, शुक्रिया पल्लवी,,तुम इन पंक्तियों में छिपे अर्थ को पढ़ पाई… 🙂

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