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सपने में साजन

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Dec 2011 Contest, Hindi Poetry

सपने में साजन 

 

खुशियाँ सी भर आयी,

खुद ही यूँ मेरे में ,

कि चन्दा का आना हो,

रैन के बसेरे में   ।

 

 

जीवन की तन्हाई,

पल भर में बिसरायी,

झूली थी जी भर के,

दिल के हिलोरे में   ।

 

 

उनकी वो यादें भी,

करने लगी बातें सी,

मस्ती सी छायी थी,

तन्हा से डेरे में  ।

 

 

सूनी सी शय्या में ,

बहकी थी अँगडाई,

सपने में साजन थे,

बाँहों के घेरे में  ।

 

 

 ***** हरीश चन्द्र लोहुमी

4 Comments

  1. siddhanathsingh says:

    meethi aur mridul rachna.

  2. prachi sandeep singla says:

    veryy nice 🙂

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