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सीलन

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Hindi Poetry
बातें पी पी के,
सीलन आ गयी दिल की दीवारों पे,
सोच रही हूँ,
‘मुरम्मत करवा लूँ’..!!
 
सुनो,
सीलन खुरचुं अगर
तो टुकड़े  पकड़ने  आओगे ना..!!!
 
 
 
 
 

12 Comments

  1. Harish Chandra Lohumi says:

    घाव गहरे लगते हैं प्राची जी,
    सुन्दर रचना !!! अच्छी लगी !!!

  2. pallawi says:

    oh very nice!!

  3. Ruchi Misra says:

    Very nice…:)

  4. siddhanathsingh says:

    kya baat hai, Meena kumari ki ye panktiyan yaad aa gayin-
    टुकड़े टुकड़े दिन बीता और धज्जी धज्जी रात मिली
    जिसका जितना दामन था उतनी ही सौगात मिली.

  5. neeraj guru says:

    शानदार.एक बेहतर और परिपक्व रचना.यही अंदाज़ बनाये रखो.

  6. U.M.Sahai says:

    अति-सुंदर पर एक ग़मगीन रचना, प्राची. इतनी young age में दिल में इतना दर्द समाना कुछ अजीब सा लगता है, फिर भी बहुत-बहुत बधाई.

    • prachi says:

      @U.M.Sahai, shukriya 🙂 and aisa kuch nahi hai i just listened d word ”सीलन” ऐसे ही बातों बातों में और फिर ख्याल आया क्यूँ ना इस वर्ड पे कुछ लिखा जाए,,kaafi poetic lagega..and so dis poem… ye incident ajeeb ho sakta hai na,,ryt 🙂

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