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अमावस

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Hindi Poetry
पूनम की रातें थी,
एक चाँद धरती के आंचल में
नगीने सा चमक रहा था,
और दूजा
ख़ुशी के जैसे आँखों में दमक रहा था…
 
मगर……………….
देखते ही देखते
एक आंधी सी आई
और चाँद  बुझा बुझा बेबस सा
टपकने लगा झर झर
आँखों से,
 
हिम्मत करके नजर उठाई ,
 
ऊपर देखा,
आँचल उधड चुका था,
 
”रातें अब अमावस में बदल चुकी थी”….!!
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

7 Comments

  1. Prachi says:

    मुझे personally महसूस हो रहा है कि इस कविता में कहीं कुछ कमी सी रह गयी,,ख्याल के मुताबिक ढाल नहीं पायी मैं इसे… 🙁

  2. dp says:

    mujhe to achchhii lagi…agar aap chaah hii rahi hain to sudhaar kar dijiyega jab bhi chaahe.

  3. Vishvnand says:

    आपको कुछ गहन सा अहसास हुआ है जो सुन्दर है पर एक तरफ आपको शब्दों में उसे ढालने को कठिनाई हो रही है और दूसरी तरफ वो अहसास स्पष्ट समझने में भी शायद आपको कुछ कमी लग रही है. आपका कमेन्ट पढ़कर ही ऐसा कुछ लगा अन्यथा रचना अच्छी बन पड़ी है और विचारों को चालना दे रही है .
    बधाई

  4. dr. ved vyathit says:

    अमावस को पूनम में बदल दो
    घिर आये अँधेरे को झटक दो
    आँखों से तेरी ज्वाला खूब टपकती है
    जो दुःख हैं तेरे पास दूर पटक दो
    सुंदर रचना है
    बधाई

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