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इन्सां की सोच से गुजरकर क्यों ईश्वर उसका भाग्य नहीं लिखता..!!

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Crowned Poem, Hindi Poetry
ज़िन्दगी ख़त्म हो जाती है,तलाश को  मगर आराम नहीं मिलता,
इन्सां की ख्वाहिशों को  अक्सर  कोई  जायज मुकाम नहीं मिलता..!
 
जाने कौन सी सिलाइयों से पैबंद जड़ते हैं ज़िन्दगी में लोग,
समझौतों के इन पैबन्दों का मुंह जो कभी भी नहीं फिसलता..!
 
कोलाहल भी चलता है मन में और द्वन्द भी होता है अवश्य,
पर शर्त निभानी है ज़िन्दगी की,सो ये शोर बाहर नहीं निकलता..!
 
भाग्य की चोट से कुचलकर मात खा जाते हैं क्यूँ सदा अच्छे ही लोग,
जाने  इन्सां की सोच से गुजरकर क्यों  ईश्वर उसका  भाग्य नहीं लिखता..!!
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

19 Comments

  1. Harish Chandra Lohumi says:

    Good Question !

  2. amit478874 says:

    बहुत ही गहेरा और धारदार सवाल..! Very nice..!

  3. neeraj guru says:

    शानदार ग़ज़ल.ग़ज़ल के भाव अच्छे है.
    कृपया अपने प्रोफाइल को फिर से लिखे बिना SMS भाषा का प्रयोग किये.

    • prachi says:

      @neeraj guru, शुक्रिया सर 🙂 आपकी टिप्पणी बहुत मायने रखती है…sms भाषा ज्यादा नही है प्रोफाइल में पर अगर आप कहते हैं तो मैं फिर से लिख दूंगी 4 sure 🙂

    • Prachi says:

      @neeraj guru, hv updated my profile as per ur comment 🙂

  4. siddhanathsingh says:

    समझौतों के इन पैबन्दों का मुंह जो कभी भी नहीं फिसलता..!इस वाक्य का मतलब न समझ सका, मुंह फिसलने का मुहावरा थोडा अनसुना सा है. कविता गंभीर और विचारोत्तेजक है, जिज्ञासा के लिए क्षमा चाहूँगा परन्तु सोचता हूँ पूछ लेना ठीक होता है.

    • prachi says:

      @siddhanathsingh, आपकी जिज्ञासा का हमेशा स्वागत है सर 🙂 हाँ,,आपने ठीक कहा ये थोडा अनसुना सा है,,ये मेरी खुद की ही कल्पना में से उपजा मुहावरा सा है जिसका अर्थ है कि समझौते के पैबन्दों का मुंह कभी भी उधड कर नीचे नहीं गिर जाता ज़िन्दगी की चादर पर से,,खुलना शब्द ज्यादा सही रहता परन्तु मैंने फिसलना लिख कर एक प्रयोग करने की कोशिश की है..आशा है आप अब संतुष्ट होंगे..मेरी त्रुटी अगर कहीं पर लगती है तो कृपया बताने का कष्ट करें 🙂

  5. pallawi says:

    कोलाहल भी चलता है मन में और द्वन्द भी होता है अवश्य,
    पर शर्त निभानी है ज़िन्दगी की,सो ये शोर बाहर नहीं निकलता..!
    bohut achchi lagi ye panktiyaan !!

  6. rajdeep says:

    marvelous

  7. parminder says:

    बहुत सुन्दर !

  8. nitin_shukla14 says:

    No Words to Describe Prachi, Umda….

    Badhaii

  9. surenmohta says:

    “जाने इन्सां की सोच से गुजरकर क्यों ईश्वर उसका भाग्य नहीं लिखता..!!”

    बहुत खूब ! इन्सान को खुद मुख्त्यार न बनाकर, भगवान हमेशा परीक्षा लेता है

    सुरेन

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