« »

एक दिन ऐसा आयेगा,जब देश अमर हो जायेगा

4 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 5
Loading...
Oct 2010 Contest
   एक दिन ऐसा आयेगा,जब देश अमर हो जायेगा ,

अभिमानित हो, गौरवान्वित हो, विश्वपटल पर छाएगा ।

 

सीमाओं का न बंधन होगा, न कोई आतंकी कहलायेगा,

भिन्न-भिन्न सब भाषाओँ से,प्रेम का स्वर ही आएगा।

 

एक दिन ऐसा आयेगा,जब देश अमर हो जायेगा …………..

 

हर तन पर तब कपड़े होंगे, साधू न भूखा जायेगा,

हर नन्हें हाथों में पुस्तक होगी, बाल-श्रम मिट जायेगा।

 

एक दिन ऐसा आयेगा जब देश अमर हो जायेगा…………….

 

नारी शक्ति सम्मानित होगी, परदे की आड़ न पायेगी,

स्त्री-शोषण का भय न होगा, दहेज़ लोभ मिट जायेगा।

 

एक  दिन ऐसा आयेगा जब देश अमर हो जायेगा…………..

 

लडकी हो या लड़का   हो, समकक्ष ही कहलायेगा,

कन्या-भ्रूण का पाप न होगा,उत्कृष्ट समाज बन पायेगा।

 

एक दिन ऐसा आयेगा जब देश अमर हो जायेगा………….

 

सजतीं हैं महफ़िल  जैसे अब, इज्जत लुटती हर रात इधर,

वैश्यावृत्ति जैसा कलंक तब और पनप न पायेगा।

 

एक दिन ऐसा आयेगा जब देश अमर हो जायेगा………….

 

जाति-पांति का भेद न होगा, धरम भेद मिट जायेगा,

आरक्षण के नाम पर तब, न कोई आन्दोलन कर पायेगा।

 

एक दिन ऐसा आयेगा जब देश अमर हो जायेगा………..

 

आज जो जेबें भरतें हैं, और रिश्वत बिन न कुछ करतें हैं,

ऐसे लोगों का पाप यह जब, चहुँ ओर उजागर हो पायेगा,

रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार, जब  जड़ से मिट जायेगा,

विश्वाश हमें है, तब देश हमारा अज़र-अमर हो जायेगा।

 

मंदिर – मस्जिद पर दंगे ना होंगे,

राजनीति के दुष्चक्र में फंसकर,

आतंकवाद न बढ़ावा पायेगा,

उस दिन ही यह देश हमारा, विश्वपटल पर छाएगा।

 

एक दिन ऐसा आएगा जब देश अमर हो जायेगा…………..

 

पाश्चात्य संस्कृति का वास ना होगा,

देश की संस्कृति का हास ना होगा,

नाम उन्नति का लेकर,पश्चिमीकरण ना बढ़ पायेगा

वह दिन अवश्य ही आएगा, जब देश अमर हो जायेगा।

 

गुंडागर्दी, अत्याचार,

आत्महत्या और बलात्कार

देश को और ना खोखला कर पायेगा

उस  दिन, हाँ उसी दिन,यह देश अमर हो जायेगा

 

एक दिन ऐसा आएगा,जब देश अमर हो जायेगा …………

 

रुढ़िवाद और क्षेत्रवाद सब जड़ सी ही मिट जायेंगे

हम सब एक माला में गुंथकर एक ही स्वर में गायेंगे

धैर्य धरो हे मानव तुम , वह दिन शीघ्र ही आयेगा

जब यह प्यारा देश हमारा, विश्वपटल पर छायेगा

 

एकदिन ऐसा आएगा,जब देश अमर हो जायेगा …………

यह न कोई दिवास्वप्न है , यह सच्ची अभिलाषा है

पूर्ण होगा अवश्य एक दिन यह, मुझको ऐसी आशा है

समाज सुधरने में बहुत समय है, हम स्वयं सुधर जब पायेंगे

भारत देश को उसी वक्त हम विश्वपटल पर पायेंगे

 

 

 

 

15 Comments

  1. rajiv srivastava says:

    Ati sunder.prernadayi,bhaktimayi.marmsparshi rachna badahai

  2. vibha mishra says:

    सर्वप्रथम आपको इस उत्कृष्ट रचना के लिए हार्दिक बधाई देना चाहती हूँ

  3. vibha mishra says:

    aapne dsh ki jwalant samasayon ka sajiv chitran kiya hai jo ki sarahniya hai .yadi humaara desh in sabhi samasyaon ka nivaran ker le to wah hum sabke sapno ka bharat ban jaayega ……..ati uttam rachna

    • nitin_shukla14 says:

      यह रचना edit करते वक्त Delete हो गयी और फिर मैंने इससे पुनः पोस्ट किया है
      प्रथम बार जब पोस्ट किया तब श्री विश्व्नानद जी और मेरे बीच यह चर्चा हो रही थी कि यह समस्याएं देश की नहीं अपितु व्यक्ति विशेष की हैं/हम सब की हैं, तो इस स्वप्न को पूरा करने का एक मात्र उपाय है, स्वयं में सुधार लाना
      Well, Thanks a Lot for Reading & Commenting…..

  4. Dhirendra Mishra says:

    Really very nice Nitin. Very good composition..

  5. rajivsrivastava says:

    kya aisa din kabhi aayega ! jab tak hum sab mil kar prayash nahi karenge muskil hai-par umeed par jindgi chalti hai.aisa ek din hoga jaroor

  6. Abhishek Khare says:

    नितिन जी बहुत ही अच्छी रचना है | बधाई |

  7. Harish Chandra Lohumi says:

    बहुत अच्छे नितिन जी,
    देर से आये लेकिन दुरुस्त आये !
    और देश को “अमर” करने का प्रस्ताव भी साथ में लेते आये । बहुत खूब !!

  8. Vishvnand says:

    बहुत मनभावन , अर्थपूर्ण परिपूर्ण और प्रभावी
    हर अपनों को ललकारती देशभाक्तिपर सुन्दर रचना
    अंतिम stanza उत्कृष्ट
    “एकदिन ऐसा आएगा,जब देश अमर हो जायेगा …………
    यह न कोई दिवास्वप्न है , यह सच्ची अभिलाषा है
    पूर्ण होगा अवश्य एक दिन यह, मुझको ऐसी आशा है
    समाज सुधरने में बहुत समय है, हम स्वयं सुधर जब पायेंगे
    भारत देश को उसी वक्त हम विश्वपटल पर पायेंगे”
    बहुत प्रशंसनीय रचना
    हार्दिक अभिवादन

  9. nitin_shukla14 says:

    सर! सादर आभार
    इस खूबसूरत प्रसंशा के लिए हार्दिक धन्यवाद
    अंतिम चार पंक्तियाँ आपके सुझाव उपरान्त ही लिखी गयी है
    अतः आपका भी इस कविता में योगदान है
    बहुत-बहुत धन्यवाद

Leave a Reply