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चंद पंक्तियाँ – ५

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Hindi Poetry
हम तो तेरे इश्क में रो-रो कर जिए जाते हैं
दिन को सोते हैं और रातों को जाग जाते हैं॥
 
 
लोग कहते हैं आशिक और दीवाना मुझको
हम तेरे हुस्न की इरशाद किये जाते हैं॥
 
 
कल रात को लेटे थे, तेरी याद आई
आज बैठे हैं, दिले ज़ख्म सिये जाते हैं॥
 
 
देखा बैठे यूँ गैर के पहलू में तुझे
हर जाम मोहब्बत का पिए जाते हैं॥
 
 
हुआ जो इल्म की तूने घर छोड़ा
हो “उदास” हम यह आलम ही छोड़ जाते हैं॥

8 Comments

  1. rajiv srivastava says:

    Irshad kuch aur kahe aapna haal-e-dil–

  2. Vishvnand says:

    वाह, बहुत अच्छे मनभावन
    जिस खूबसूरती से आप ये हाले दिल फ़र्माये जाते हैं
    हम इसमें छिपे सारे दर्द खुश हो के पिए जाते हैं

  3. Abhishek Khare says:

    शुक्ला जी बहुत अच्छे | लिखते रहिये |
    विजयादशमी की शुभकामनायें |

  4. Harish Chandra Lohumi says:

    यूँ तो अल्फ़ाज़ कोई भी नही छोड़े तुमने,
    “चंद पंक्तियाँ” हम भी नाम तेरे कर जाते हैं ।

    बहुत सुन्दर नितिन जी !!! बनी रहे !!!

    • nitin_shukla14 says:

      Kya Baat hai Harish Ji, aap bhee hamare rang main Rang Gaye,
      Par ek chhej batoon, main iss rang main 14 saal pahle ranga tha aur tab hee yeh rachna ka srijan hua tha…….. aap ……

      Well Thank you so much for such a nice comment
      Achha Haan Bahut dino se Poochna Chah Raha tha, aap Lucknow main ho aajkal, Basicaly wahin se ho ?

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