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“मातृ रूपेण संस्थिता”

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Hindi Poetry
 
सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। 
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥”
 

“नारायणी! तुम सब प्रकार का  मंगल प्रदान करनेवाली मंगलमयी हो। कल्याणदायिनी शिवा हो। सब पुरुषार्थो को सिद्ध करनेवाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रोंवाली एवं गौरी हो। तुम्हें नमस्कार है।

संसार के सभी जनों के कल्याण की कामना मन में ले,नवदुर्गा के नव रूपों को मेरा शत-शत नमन है।आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।

एक हाथ त्रिशूल विराजे, दूजे कमल का फूल

शैलपुत्री“, रक्षा करतींदिन प्रथम  पधारें  सब दूर॥१॥

 

विद्याज्ञान की ज्ञाता जो हैं, श्वेत वस्त्र में लिपटीं हैं

द्वितीया  मेंब्रह्मचारिणी“, हर विघ्नों को वो हरतीं हैं॥२॥  

 

शक्ति रूप विराजें जो, मस्तक चन्द्र किये धारण

तृतीया रूपचंद्रघंटादेवी, कष्टों की वो हैं तारण॥३॥

 

रोग,शोक,विनाश को हरने वालीं, अष्टभुजाधारी  

देवीकुष्मांडा“,चुतुर्थ रूप में, करें बाघ सवारी॥४॥

 

विद्यावाहिनी,चतुर्भुजी, पंचम हैंस्कन्दमाता

धर्मकर्म हर सुख पाता,जो इनकी शरण में आता॥५॥

 

दुर्गा रूप छठी देवी, “कात्यायनी” हैं कहलातीं वो

बायें हाँथ तलवार लिए,संहार असुरों का करती जो॥६॥

 

सप्तम रूप विराजें जो, “कालरात्रि” कहलातीं हैं

विनाशिका काली माता,सातवें दिन को आतीं हैं॥७॥

 

चैतन्यमयी,अन्नपूर्णा,मंगला,तापों को हरने वालीं हैं

ये देवी “महागौरी”, अष्टमी को सुख-शांति बरसाने वालीं हैं॥८॥

 

नवम  रूप धर, “सिद्धिदात्री” माँ,सरस्वती का रूप हैं जो

युगों-युगों से पूजी जातीं,यश का संचार हैं करतीं वो॥९॥

 

सच्चे ह्रदय जो पूजे इनको,माँ उसे बहुत लुभाती हैं

“नवरात्रों” के इन नव रूपों में, हर बरस में दो बार आतीं हैं॥१०॥

 

 

 

 

12 Comments

  1. rajivsrivastava says:

    main aaj nat mastak ho mata ke aage aur aap ki aage -wah kya varnan hai mata ki avtaro ka-badhayi

    • nitin_shukla14 says:

      राजीव आभार स्वीकारें
      चलो हम सब मिल माता की करें जय जयकार

  2. kishan says:

    nice maiya durga sabki manokamna puri kare

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेणसंस्थिता।
    नमस्तस्यैनमस्तस्यैनमस्तस्यैनमोनम: ॥
    विद्या एवं कला की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती बुद्धि प्रदायिकाहैं। विद्या तथा कला की उपासना बुद्धि के बिना असंभव है। दुर्गा सप्तशती में अत:इनको बुद्धि-स्वरूपा ही उद्घोषित किया गया है।

    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं नितिन जी ! माँ का गुण-गान कर आपने इस मन्च को पवित्र कर दिया । हार्दिक बधाई !!!

    • nitin_shukla14 says:

      हरीश जी यह सब आपका प्यार और माँ का आशीर्वाद है जो आज मन कुछ अलग लिखने को प्रेरित हुआ
      बुद्धिरूपेणसंस्थिता का कथन सही साबित हुआ
      बहुत-बहुत धन्यवाद आपका

  4. nitin_shukla14 says:

    अरे! हाँ रजत पदक , सही कहा हरीश जी
    धन्यवाद

  5. Vishvnand says:

    अति मनभावन सुन्दर भक्तिपर प्रयास
    आनंदित हो हार्दिक प्रशंसा और बधाई के पात्र,
    लगा जैसे रचना को खुद दैवी वर है प्राप्त

    • nitin_shukla14 says:

      कई दिनों के बाद आपका आशीर्वाद मिला
      पाकर प्रसन्नता का अनुभव हुआ
      धन्यवाद सर
      “नवरात्री की हार्दिक शुभकामनायें”

  6. vibha mishra says:

    जय माता दी

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