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******माया******

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Hindi Poetry

कितने सिकंदर आए कितने गए कोंन यहाँ गिनता हैं

करोडपति भी गए रोडपति भी गए एक जगह सब गए हैं

 

किशिको दफनाया गया है किशिको जलाया गया है

आखिर मिट्टीसे पैदा हुए थे मिट्टी मैं ही मिल गए हैं

 

जो पाया यही से पाया हैं जो खोया यही पे खोया हैं

समय को इसका काम करने दो वो हमारे कहेने से कभी ठहेरा  है???

 

मेरा मेरा करके क्यों मरते हों मौत सच्‍चाई है इक दिन आनी है

मेरे मन तू सम्भल जा ये सब तो दिखावा हैं ख़ुदा ने बनाया है

 

दुनिया से  क्या सीखे हम एक चिंगारी से दिया हमने जलाया हैं  

तूफ़ान चलते हैं सुख दुःख आते हैं ये सब तो उपरवाले की माया हैं

 

” किशन”

2 Comments

  1. Harish Chandra Lohumi says:

    धरती का बिछोना, आकाश की छाया,
    हनुमान जी की चौकी, राम जी की माया ।

    रोज सोते वक्त जिसने भी ये मन्त्र जपा,
    उससे बडा पूंजीपति कोई न बन सका ।

    सुन्दर किशन जी !! बधाई !!!

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