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मेरे बाद……

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Hindi Poetry

सोचो तब क्या होगा, 

जब हम चार कन्धों पर जायेंगे?  

रोओगे ऑंखें भर-भरकर,जब हमें आस-पास न पाओगे

कभी मुंख हाथों में ले,

कभी हाथों में ले तस्वीर मेरी

तुम खुद को रोक न पाओगे,

रोओगे ऑंखें भर-भरकर,जब हमें आस-पास न पाओगे।

 

यूँ तो बहुत ही कोमल है,

यह ह्रदय तुम्हारा,

भूलकर मुझको सबको याद यह रखता है,

कर्मों का कोई फल न आता,

भाग्य भी मुझको ठगता है,

यह बतलाओ,

क्या तुम हमको भूल पाओगे?

या रोओगे ऑंखें भर-भरकर, जब हमें पास न पाओगे।

 

रातों को उठ-उठकर तुम,

डरकर बैठ जाओगे,

माथे पर सिन्दूर नहीं,

तुम चूडी पहन न पाओगे

बोलो क्या तुम ?,

हमसे बिछड़ने का यह गम सह पाओगे

रोओगे ऑंखें भर-भरकर,जब हमें आस-पास न पाओगे

 

सुन्दरता पर कौन मिटेगा  

किसको सजकर दिखाओगे? 

और कौन तुम्हे बाँहों  में लेगा

जब तुम नयी साड़ी  में आओगे? 

बोलो तब क्या याद करोगे?जब हमें आस-पास न पाओगे।

 

जब भी कोई गम होगा,

क्या लबों पर न लाओगे

गर लाओगे तो,बोलो

फिर किसे बताओगे?

और किसकी गोदी में सर रखकर

सारे दर्द भुलाओगे?

रोओगे ऑंखें भर-भरकर,जब हमें आस-पास न पाओगे।

 

सारे त्यौहार होंगे झूठे तब

और सारे रिश्ते-नाते भी

बोलो तब भी क्या तुम

सारे दिन प्यासे रहकर

करवाचौथ रख पाओगे?

बोलो तब क्या याद करोगे?जब हमें आस-पास न पाओगे।

 

प्रिये,

आना-जाना सब नियम प्रकृति के

क्या कोई इन्हें है रोक पाया,

भूल गयी वह मेरी प्यारी सी भेंट

वह  मेरा ही तो है साया,

और फिर भी मैं जो याद आऊँ तो

खो जाना मेरी इन कृतियों में

देखो फिर मत रोना तुम

हरदम रहना स्मृतियों में

 हरदम रहना स्मृतियों में…………

13 Comments

  1. nitin_shukla14 says:

    रचना को कदापि अन्यथा न लें
    आप सब एक कवि हैं,और कवि की भावनाओं को शायद बेहतर समझते हैं
    समस्या इस बात की है, अगर कोई भाव मन में आयें तो उन्हें कागज पर उतारना जरूरी हो जाता है और जब p4 का मंच मिला है तो publish करने को भी उत्सुक हो जाता हूँ

  2. rajivsrivastava says:

    marmsparshi sunder rachna ek satya-sunder rachna

  3. Vishvnand says:

    इस रचना को आपके खुद के कमेन्ट ने एक नया रूप दिया है और अब ये रचना किसी कवि की व्यक्तिगत नहीं पर कई स्तरों पर सबकी सी ही लग रही है,
    Mortal प्यार में उठती हुई Anxieties और worries का रचना में सुन्दर भावनिक विवरण है.
    इस रचना के लिए हार्दिक बधाई

    कुछ कुछ जैसे आपके कमेन्ट के भावों को ही लेकर जो दिल में आया उसे मै भी आज पोस्ट कर रहा हूँ . शीर्षक है
    “कविता के लिए जुनून (Passion for poetry)” ….!

    • nitin_shukla14 says:

      सर,
      आपका कमेन्ट पढ़कर बहुत हौसला मिला क्योंकि यह एक कवि की भावनाएं मात्र नहीं हैं,यह तो शाश्वत सत्य भी है जिसे कोई भी मनुष्य नकार नहीं सकता,हाँ यह जरूर है यह रचना मेरे अंतर्मन के भय को दर्शाती है, परन्तु जन्म-मृत्यु के इस चक्र से किसीको मुक्ति नहीं मिल सकती और जो आया है उससे जाना ही पड़ेगा

      आपका कमेन्ट पढ़,पहले मैंने आपकी कविता पढ़ी, फिर उत्तर दे रहा हूँ, आपने सच ही कहा है,यह कविता लिखने और उसे शेयर का जूनून ही है और कुछ नहीं,बहुत खूब लिखा आपने,हमारे अंतर्मन की सारी बातें लिख डालीं
      Bahut bahut dhanyavad Sir !

  4. Harish Chandra Lohumi says:

    गज़ब का दर्द लिये हुए आपकी यह रचना नितिन जी, एक बार नहीं कई बार पढा ।
    लेकिन जो सत्य है तो है । कौन रोक पाया उसे ।

    अच्छी रचना , बधाई !!!

    • nitin_shukla14 says:

      हरीश जी आपसे येही उमींद थी, आप इन भावनाओ को जरूर समझेंगे, कविता पोस्ट करते समय बहुत भयभीत था कि पता नहीं कितने फटकार भरे कमेंट्स आने वालें हैं क्यूंकि p4 पर सभी गणमान्य जन अपने साथी कवियों को और उनकी भावनाओ को personal भी लेतें हैं, और इससे उनका प्यार भी झलकता है
      आप सभी को इन् प्यार और प्रशसा भरे संदेशों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

  5. Ruchi Misra says:

    करुण रस से परिपूर्ण यह रचना निश्चय ही मन में उद्द्विग्नता लाती है, परन्तु यह प्रेम शाश्वत है | अति मार्मिक |

    • nitin_shukla14 says:

      रचना को इस हद तक समझने के लिए धन्यवाद
      Thank You So Much

  6. Dhirendra Misra says:

    मानव जीवन का यह कटु सत्य जब सात फेरे में बंधे प्रेमी युगल को इस बंधन से अनिच्छा से विलग होना, पर हमें प्रकृति के इस नियम का पालन करना पड़ता है | इस सत्य को रचना के द्वारा गहन रूप से प्रस्तुत किया गया |

    • nitin_shukla14 says:

      आपने इस रचना और भाव भर दिए
      हार्दिक धन्यवाद

  7. rajdeep says:

    yes
    i too felt the same
    i really liked it
    thanks

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