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“एक और कशमकश”

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Hindi Poetry

कवियों ने कविता लिख डाली,

‘कशमकश’ पर विजय पा ली,

अब निर्णायक की  बारी है,

निभानी जिम्मेदारी है। 

 

हम सब की ‘कशमकश’ से,

उनकी ‘कशमकश’ भारी है,

क्योंकि p4  पर आयीं,

उत्तम रचनाएँ इतनी सारीं हैं। 

 

8 Comments

  1. vibha mishra says:

    क्या बात है शुक्ल जी मन की बात को आपने अपनी इन पंक्तियों में सजीव केर दिया …..बधाई

    • nitin_shukla14 says:

      जिस तीव्र गति से आपने यह सुन्दर प्रतिक्रिया व्यक्त की हैं
      उसी तीव्र गति से मैं आपका धन्यवाद देना चाहूँगा

      बस इतना ही कहना चाहूँगा –
      “कशमकश की कशमकश ने कितनों को कशमकश में डाल दिया
      कवि क्या कम थे जो निर्णायकों को भी मुहाल किया”

  2. Vishvnand says:

    किसी भी शक से कशमकश बढ़ जाती है
    अगर शक न हो तो कशमकश बहुत कम हो जाती है
    साहस और विश्वास में आदमी टस से मस नहीं होता
    तो कशमकश क्या चीज़ है, वो खुद कशमकश में भाग खडी होती है …. 🙂

  3. dr.paliwal says:

    Bahut khoob……

  4. Harish Chandra Lohumi says:

    कशमकश ही कशमकश है नितिन जी, पता नहीं एक और्…फ़िर कब पैदा हो जाये ।
    बधाई !!!

    “तरबटनमरबटकमलककलदनथददर” …….….…

    सब में “ए” की मात्रा लगाकर पढे तो यह कशमकश तो दूर हो जायेगी ।

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