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चंद-पंक्तियाँ – ६

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Hindi Poetry

शहादत नाम पर हमने, इबादत आज यह की है

सीमाओं के फ़ासले मिट जाएँ, यह दुनिया हम सभी की है

 

समझता हर है आशिक यह,इश्क आग का दरिया

फिर भी कूद जाता है, कहे तैराक है बढ़िया

 

मुहब्बत में कभी हार नहीं होती
हर किसी हथियार में धार नहीं होती
हम तो शायर हैं,बेबाक़ लिख देते हैं
क्यूंकि विचारों के बीच दीवार नहीं होती

 

कैद रखा तुझे दुनियां की नज़रों मे

डरता था कहीं नज़र न लग जाये

आज तेरे हुस्न की चर्चा है जब सुनी

फिर डर गया हूँ, तू औरों की न हो जाये

 

छुपा के रखूंगा तुझको, कि ज़माना ख़राब है

बहकता इन्सान है पीके,क्यूँ बदनाम शराब है

तेरी नज़रों से पीऔर फिर भी बहक गया

तुझे इल्म भी नहीं, तेरा हुस्न लाज़वाब  है

 

 

नज़रें झुका के, हमसे इश्क की जो इरशाद कर दी

जाने कितने दीवानों ने अपनी जिंदगी बरबाद कर दी

 

इरादा तुमने से मिलने का जब भी किया हमने

तुम्हारे गेसुओं ने खुलकर दिन में रात कर दी थी

तुम्हारे हुस्न पर लिखने की कोशिश जब भी की हमने

तुमने सामने आकर प्रेम की बरसात कर दी थी

 

नवाबी शौक है तुमको दिलों से खेला करते हो

आज किसी आगोश में, कल किसी और में मिलते हो

मुहब्बत में है वजन कितना,दिलों से तौला करते हो

ज़माने की है नज़र तुम पर,तुम हर नज़र पर गिरते हो

 

4 Comments

  1. Ashu says:

    Great lines…..
    हम तो शायर हैं,बेबाक़ लिख देते हैं
    क्यूंकि विचारों के बीच दीवार नहीं होती

    ………………………………………………………………
    बावफा बेवफा नहीं होता
    यूँ ही ख़तम कोई सिलसिला नहीं होता
    कोई तो मज़बूरी रही होगी उसकी
    यूँ ही कोई बेवफा नहीं होता

  2. Vishvnand says:

    बहुत खूब
    बहुत सुन्दर अंदाज से है यहाँ हर बात आपने कही
    पढ़कर दिल बाग़ बाग़ हो दे रहा आपको बधाई ….

  3. rajivsrivastava says:

    subhan allah ! kya baat hai–badahai

  4. priya says:

    Aap to aaj kal romantic panktiyan likhne lage.,,,,, kya baat kya baat,,,,

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