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(*)2010 की यादे …. सिर्फ भ्रष्टाचार …सिर्फ भ्रष्टाचार(*)

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Dec 2010 Contest, Hindi Poetry

2010 की यादे …. सिर्फ भ्रष्टाचार …सिर्फ भ्रष्टाचार

समय की रेखा  भारत वर्ष मै  ऐसे  चली  की  पता  ही  ना  चला  की  2010 जा  चूका 

और  2011 आ गया कितने कौभांड देश के बहार आए खेल से लेके टु-जी और

हमे ये सब भूल ने की आदत हो गई है क्यूँकी बड़े लोगो की बड़ी बाते हमारे देश मै

कौभांड देश का एक हिस्सा बन गया है और ऐसे कौभांड करने वाले शरीफ बन जाते है …. 

 

खेर हमारा देश कसाब को सजा नहीं दे सकता

शहीद होने वाले लोगो की शान नहीं बढ़ा सकता

 

नेता क्या खाए पता नहीं चलता गरीब एक टाइम खा भी नहीं सकता

महगाई ने मार डाला अब भ्रष्टाचार देश से जा नहीं सकता

 

सत्य की मशाल लेके गांधीजी ज़ेसा कोई अब चल नहीं सकता 

निडर आजाद जेसी मर्दानगी कोई अब दिखा नहीं सकता  

 

कहेते है सफ़ेद रंग शांति का प्रतिक है नेता काले कपडे पहेंन नहीं सकता 

देश की आन और शान पे सवाल है अब विवेकानंद जैसा कोई आ नहीं सकता 

 

यही है हमारी यादेँ २०१० की क्यूँकी ये हिसाब कोई रख नहीं सकता

मजबूर हो के हम आगे बढ़ जाते है  मज़बूरी का नाम महात्मा हो नहीं सकता

“किशन”

6 Comments

  1. Vishvnand says:

    अलग किस्म की अर्थपूर्ण रचना
    विशेष और मनभावन है .
    इस सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई है
    जय श्री कृष्ण …

  2. P4PoetryP4Praveen says:

    क्या बात है किशन भाई…हिंदी अच्छी होती जा रही है आपकी…

    बहुत-बहुत बधाई और नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएँ… 🙂

    आपकी रचना के कुछ हल मेरी इस रचना में छुपे हैं…ज़रा गौर फरमाईयेगा…

    https://www.p4poetry.com/2010/12/18/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%82-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%a7%e0%a5%80/

  3. parminder says:

    देश की अफ़सोस-जनक स्तिथि बाखूबी बयाँ की है आपने| पेश करने का ढंग अलग और सुन्दर है|

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