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आखिर क्या है “pyar”

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Hindi Poetry



कुदरत का अनोखा आर्शीवाद है प्यार
कभी छू ना पाओ वो एहसास है प्यार,

झूठ की दुनिया में आज भी जिंदा है प्यार
शरीर नही आत्मा का मिलन है प्यार,

अपनों को जो बाँधे वो डोरी है प्यार
जाने – अनजाने बीच की दूरी है प्यार,

गुस्से की आग पर ठंडा पानी है प्यार
कभी मयखानों में छलकता जाम है प्यार,

जवान दिलों के बीच एक सांस है प्यार
बुढ़ापे में एक-दूसरे का साथ है प्यार,

दोस्तों के बीच एक ईमानदारी है प्यार
बिना देखे अनजानी यारी है प्यार,

बदलते वक़्त में काफ़ी बदला है प्यार
अफ़सोस है कि आज टाइम पास है प्यार,

23 Comments

  1. siddha Nath Singh says:

    अच्छी रचना, मह्खानों को मयखानों कर दीजिये तो ठीक होगा.

  2. naina says:

    सच में प्यार की परिभाषा को बहुत ही अछे शब्दों में पिराया हा आपने . congratulationsssssssssssssssssssssss……….

  3. rajiv srivastava says:

    pyar ki sunder abhivakti—aur sunder prastuti–badahai

  4. kishan says:

    क्या खूब रचना है …प्यार के लिए जितना कहे इतना कम है हमारे लिए …जय श्री कृष्ण मेरी और से बधाई अच्छी रचना के लिए

  5. KasaK....Dil ki says:

    pyaar ko ek bht hi khubsurat ruup me sajake pesh kiya hai aapne anju ji…bht khubsurat rachna hai ye aapki… dheron badhai….

    • anju singh says:

      @KasaK….Dil ki,
      आप को भी ढेरों धन्यवाद कसक जी… अच्छा लगा आप की प्रतिक्रिया को पढकर बस अब साथ मत छोड़ना… मतलब आप समझ गयी ना .. भाई हौंसला बढाने के लिए भी और कमी बताने के लिए …

  6. jitender kumar says:

    आप ने तो सारी बातो को अनमोल अंदाज में लिखा है ,
    प्यार क्या होता है बहुत ख़ूब लिखा है ,
    हम नादान थे इन बातो से उन्ही बातो को ,
    बहुत अच्छा समजाया है , धन्यवाद ……………………..
    ………………………………………………………………

  7. dr.ved vyathit says:

    मैं गया एक दिन यूं ही बाजार को
    टांगते लोग बहर जहां प्यार को
    कोई आये खरीदे यहाँ प्यार को
    खूब बेचा खरीदा गया प्यार को
    सुंदर रचना
    बधाई

  8. Vishvnand says:

    प्यार पर अलग सी बेहद शानदार और प्यारी रचना
    दो बातें
    १ ) आखिर क्या, शुरू से आखिर तक यही तो है प्यार
    २ ) सुना है प्यार को ही रचना की रचयिता से हो गया है प्यार

    इस सुन्दर मनभावन रचना के लिए हार्दिक commends
    Stars 5 + +

    • anju singh says:

      @Vishvnand,
      नमस्कार सर जी…
      कैसे है आप… आप की प्रतिक्रिया का मुझे बहुत बहुत इन्तजार रहता है… आप की प्रतिक्रिया के बाद ही लगता है कि मेहनत वसूल हो गयी…
      नालायक अंजू.. आप की आभारी है…?

  9. Harish Chandra Lohumi says:

    वाह अंजू जी ! प्यार की विभिन्न परिभाषाओं के साथ-साथ प्यार के परिवर्तन को भी बखूबी दर्शाया है आपने .
    बहुत खूब ! रूह के इस एहसास को शब्दों में ढालती हुई एक छू लेने वाली रचना .
    हार्दिक बधाई ! अर्पण हैं पंच-प्यारे ( ***** ) इस प्यार भरी रचना पर !

    • anju singh says:

      @Harish Chandra Lohumi,
      आप ने ऐसा महसूस करा मेरे लिए यही बहुत बढ़िया बात है …
      आप का बहुत बहुत धन्यवाद सर ….
      सॉरी दरसल पहले वाला जवाब मैं दादा जी को कर रही थी …मतलब विश्वनंद दादा को…

      • Harish Chandra Lohumi says:

        @anju singh, और ये वाला जवाब क्या हमारे लिए ही है ? क्योंकि मैं तो यह नहीं समझता की “सॉरी” वाली कोई बात है . 🙂

        • anju singh says:

          @Harish Chandra Lohumi,
          ji sir yeh aap ke liye hi hai.. or sorry ki jarurt to thii… aap ka मन बड़ा है आप इसलिए बोल रहे हो की सॉरी की जरुरत नहीं thi

  10. U.M.Sahai says:

    प्यार का मतलब समझाने की कोशिश करती एक अत्यंत सुंदर कविता, अंजू जी, बधाई. मैंने भी इसी विषय पर एन कविता लिखी है जिसका शीर्षक है ” प्यार आखिर क्या है ” . पढ़ कर कमेन्ट कीजियेगा तो उत्साह वर्धन होगा.

    • anju singh says:

      @U.M.Sahai,
      जी बिलकुल करुँगी सर… आप नहीं कहते मै तब भी कमेन्ट करती.. वैसे हौंसला बढाने और तारीफ के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आप का …

  11. Suresh Rai says:

    BAHUT SUNDER RACHNA ANJU JI.

    कर्ज सा हो उन पर मेरा प्यार, ब्याज बढ़े, कम मूल न हो

    किश्ते वो सदा पूरी चुकायें, जीवन भर कर्ज वसूल न हो

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