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एक अदालत जो ऊपर है …..!

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Hindi Poetry

कुछ  कारणवश  यह  पुरानी  रचना  फिर  पोस्ट  करने  मजबूर  कर  रही  है  और  कबसे  सोच  रही  है  की  ऐसा  सच  जल्द  ही  देखने  सुनने  में  आये …..  कभी तो आयेगा जरूर.

एक  अदालत  जो  ऊपर  है  …..!

आज बेचारा वो बहुत व्यथित था,
झूठी गवाही देना उसका पेशा बन चुका था,
पर आज उसने कुछ और ठान लिया था,
उसकी आत्मा ने शायद उसे कुछ सुनाया था,
उसे कोर्ट में गवाह के रूप में आज फिर बुलवाया गया था,
बड़ा प्रचलित और
प्रसिद्ध संगीन मुकदमा था
अच्छी सी
झूठी गवाही देने पर बहुत पैसे पाओगे, ये  वादा था

जब उसकी बारी आयी उसे कटघरे में बुलाया गया
सामने गीता पर हाथ रखने को कहा गया
कहो ” मै गीता पर हाथ रखकर कसम खाता हूँ,
जो भी कहूंगा सच कहूंगा
सच के सिवा और कुछ नहीं कहूंगा”

उसने गीता को भावपूर्ण प्रणाम किया
और बोल
पड़ा,
”वकील साहब, और जज साहबान, आप हमसे कितनी बार
गीता की कसम खाकर
झूठ कहलवाते रहेंगे,
क्या आप नहीं
जानते कि ऐसा करना बहुत पाप है,
आपके ऊपर भी एक अदालत है
और ऊपर की अदालत हमको,
वकील साहब आपको और जज साहिब आपको भी
कभी  माफ  नहीं  करेगी
कड़ी
कठोर  नरकवास की सज़ा सुनाएगी,
आप सबसे ऐसा क्यूँ पाप करवाते हैं,
भगवान ने कही हुई गीता का नाम बदनाम करवाते हैं,
सबसे ये  पाप करवाते रहते हैं और झूठ बुलवाते हैं
मुझसे अब तक बहुत पाप करवा लिए और हो चुके,
अब और नहीं करूंगा, चाहे आप करते रहिये,
और मुझे कोई भी सजा दीजिये…..!”

और वो कटघरे से नीचे उतरकर चलता बना,
उसे कुछ
फ़िक्र नहीं थी कि वकील और जज उसका अब क्या करेंगें,
अब उसे सिर्फ ऊपर की अदालत की फ़िक्र थी.
और मन ही मन अपने धीरज और  किये  पर भी
बहुत खुशी और शान्ति महसूस हो  रही  थी ….!.

“ विश्व नन्द ”

14 Comments

  1. rajiv srivastava says:

    kaas har vayakti ye samajh le ke uupar bhi ek adalat hai–sabko har karmo ka jawab waha dena hai–wahan ko paisa,rssook ya bal nahi chalta–to shayad sabhi galat kaam karne ke pahle soochenge— ek aachi sandeshprad rachna ke liye badahai sweekaren sir

    • Vishvnand says:

      @rajiv srivastava
      आपकी prompt प्रतिक्रिया और प्रोत्साहन के लिए हार्दिक धन्यवाद .
      आपने सच ही सच कहा है इसे सब सच मान कर चले तो सच
      जीवन यहाँ कितना सुन्दर हो ..

  2. Harish Chandra Lohumi says:

    अति के बाद सदैव इति होती है सर ! आखिर सीमा की भी कोई सीमा होती है ।
    अच्छी सन्देशप्रद रचना ! बधाई !!!

    • Vishvnand says:

      @Harish Chandra Lohumi
      प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद,
      इतने बुरे देश को लूटने के घोटाले सामने आये हैं कोई तो लोग जिन ने जुर्म किया है या जुर्म करने में मदद की है, अब बिना स्वार्थ बोल दें जो हुई है सच बात …
      सीबीआई लायें तो कोई सत्य सामने निर्विवाद बिना अपने स्वार्थ
      क्या ऎसी आशा करना है बेकार …

  3. s.n.singh says:

    सच का बोलबाला होना तो चाहिए लेकिन आप को रिपीट करना पद रहा है इसी से ज़ाहिर है ऐसा हो नहीं पाता है.

    • Vishvnand says:

      @s.n.singh
      प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार.

      आपने तो जाना ही होगा आज का ad का ज़माना
      जहां झूट को बार बार बढ़ा चढ़ा कर सच सा बताना
      ही हो गया है सच को छिपाना और झूट को सच मनवाना
      इस लिए ad समान सच को बार बार कहना और बताना
      ही हो सकता है सच को बढ़ावा देना और सही समझाना ….
      सच के बोलबाले के लिए बहुत जरूरी अब हमें यही है ठानना..

  4. sushil sarna says:

    दर्पण झूठ नहीं बोलता-आत्मा के दर्पण पर जब भी इंसान अपने कर्मों का अक्स देखता है-उस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ पाता और यही उसके जीवन का मोड़ होता है-इस प्रभावशाली रचना और विषय के लिए हार्दिक बधाई सर जी

    • Vishvnand says:

      @sushil sarna
      आपकी सुन्दर प्रतिक्रया के लिए स -ह्रदय आभार
      आज हर इंसान में इस मोड़ के आने और लाने की जरूरत है,
      हर झूट को झूट और हर सच को ही सच बिना कोई झिझक कहना जरूरी है
      अब बहुत हो चुका. आशा करें कि अब इस दिशा में ही चलने की बात है
      शायद इसकी शुरुवात भी अब हो रही है
      अन्याय और रिश्वतखोरी कब तक राज करेगी ….

  5. P4PoetryP4Praveen says:

    बहुत ही बढ़िया घटना-चित्रण…और अगर उस व्यक्ति की तरह समाज का हर व्यक्ति अगर समय पर जाग जाये तो हमारा देश स्वर्ग और सोने की चिड़िया हो जाये… 🙂

    (दादा, कुछ शब्द शायद टाइपिंग की ग़लती से ग़लत आ गए हैं…जैसे “व्यतिथ” होगा “व्यथित”, “प्रसिद्द” होगा “प्रसिद्ध”, “झूट”/”झूटी” होगा “झूठ”/”झूठी”, “पडा” होगा “पड़ा”, “जानते की” होगा “जानते कि”, “नरकवास की शिक्षा” होना चाहिए “नरकवास की सज़ा”, “फ़िक्र नही” होगा “फ़िक्र नहीं”)

    • Vishvnand says:

      @P4PoetryP4Praveen
      आपकी प्रतिक्रिया बहुत सुखदायी है और रचना का पूरा भावार्थ भी है तथा मुझे मेरा प्रयास सफल लगने का समाधान.
      आपका तहे दिल से शुक्रिया …

      वैसा ही बहुत शुक्रिया आपने बताई त्रुटियों के ज्ञान के लिए l ये काफी त्रुटियाँ टाइपिंग की गलती से नहीं बल्कि मेरे हिंदी के ज्ञान की कमजोरी वश हुई हैं. मैंने ये त्रुटियाँ ध्यान से पढ़ और समझ कविता को एडिट कर सुधार रहा हूँ और अब मैं स्वस्थ और बहुत खुश हूँ कि मेरे लिए आप ऐसा समय आगे भी जरूर देंगे जिससे मेरी हिंदी सही दिशा में सुधरे और सुधरी रहे . बहुत बहुत धन्यवाद
      p4p का मेम्बरों द्वारा मेम्बरों के प्रति यही तो एक passion का महत्वपूर्ण उद्देश्य भी है …

    • Vishvnand says:

      @P4PoetryP4Praveen
      Thank you so very much
      त्रुटियाँ सुधार कर, रचना और मैं दोनों बहुत खुश …

      • Harish Chandra Lohumi says:

        @Vishvnand,
        इसे कहते हैं Kaizen Philosophy. मान गये सर!

        • Vishvnand says:

          @Harish Chandra Lohumi
          Yes indeed Harish ji. You are very right.
          I believe “P4poetry.com” should be a site where Kaizen Philosophy in effect is applied & playing its part in service of people with passion for poetry in their hearts….

  6. anju singh says:

    namaskar sir ji…
    bahut bahut बढ़िया और umda rachana…

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