« »

*****जिंदगी बस यूँही चलती रही ~@~

1 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

हमारी बेगुनाह मुहब्बत को
किसीकी नज़र लगती रही 
 
दिल से जिसे चाहते थे
वो पत्थर दिल बनती रही
 
हर पल होठों पे नाम आता रहा 
धड़कन अब मेरी ना रही  
 
साँस चलती नहीं, दिन कटता नहीं
हर बार रात ढलती रही 
 
जीने का नाम जिंदगी नहीं
हर लम्हा जिंदगी मरती रही 
 
पाने को प्यार मत कहो
उसे खोके जिंदगी तरसती रही
 
प्यार जरुरी नहीं निभाना जरुरी है
इतना वो समजती रही  
 
वो कहेती है इंतज़ार मत करो
मै किसीकी बनने जा रही    
 
आंधी में  किशन का दीप जलता रहा
और रौशनी कम होती रही 
 
सफ़र में मोड़ बदलता रहा और
जिंदगी बस यूँही चलती रही 
 
-किशन

8 Comments

  1. KasaK....Dil ki says:

    bht khubbb kishan ji..pyaar ki bekarari aur tadap ko bakhubi darshaya hai aapne……

    bht mast likha hai ji yunhi likhte rahiye…

  2. sushil sarna says:

    भावनाओं के बादलों को दिल की जमीन पर खूब बरसाने की कोशिश की है- अच्छी रचना किशन जी – बधाई

    • kishan says:

      @sushil sarna, सर कॉमेंट्स के लिए धन्यवाद ….और सर कागज पे वो ही उतर आता है जो दिल महेसुस करता है

  3. Vishvnand says:

    ये हुई कुछ बात
    अच्छी रचना, सफल प्रयास,
    मन भायी
    हार्दिक बधाई

  4. kishan says:

    धन्यवाद ,सर 🙂

  5. anju singh says:

    मै सब की बात से सहमत हु… वाकई बढ़िया रचना …बधाई
    पर कुछ शब्द दोष है आप उनको ठीक कर लो…

    • kishan says:

      @anju singh, कमेंट्स के लिए धन्यवाद और सलाह के लिए फिर से धन्यवाद ..जय श्री कृष्ण

Leave a Reply