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जीवन की परीक्षा

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Hindi Poetry

हरेक बच्चा नही आता है

कक्षा में प्रथम

और हरेक का दूसरा या तीसरा

स्थान भी नही आता है कक्षा में

तो क्या इस का मतलब है

प्रत्येक बच्चे को नही होता है

आसानी से अपना पाठ याद

जैसे युधिष्ठिर को लग गये थे

दो शब्द याद करने में वर्षों वर्ष

और बालक मोहन दास भी

नही आया था कक्षा में प्रथम

परन्तु क्या दोनों को

कहा जा सकता है बुद्धू ,कमजोर

या ऐसा ही कोई शब्द

कदापि नही

तो फिर जीवन की परिभाषा

मात्र शाब्दिक रटंत परीक्षा

नही हो सकती

और न ही यह बना सकती है

कबीर ,सूर और मीरा

जिन्होंने जीवन की चादर को

बेदाग ओढा और बिना परीक्षा दिए ही

उत्तीर्ण हो गये कठिन परीक्षा में |

6 Comments

  1. kishan says:

    सही कहा है आप ने सर ,जय श्री कृष्ण

  2. Vishvnand says:

    इक कठिन गहन महत्वपूर्ण जीवन प्रश्न
    उसका सुन्दर विवरण और समझाने का यत्न
    उदाहरण सहित सुन्दर विवेचन
    मनभावन प्रशंसनीय कविता
    है हार्दिक अभिवादन …

    • dr.ved vyathit says:

      @Vishvnand, बन्धु वर आप का निरंतर आशीर्वाद मिल रहा है
      हार्दिक आभार

  3. siddha Nath Singh says:

    बिलकुल सही, मगर बच्चे ज़रूर कहते हैं कि सूर कबीर मीरा न लिखते तो पाठ्यक्रम इतना भारी न होता.

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