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तुम्हारा मन

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Hindi Poetry

तुम्हारे मन में

असामयिक मेघों की भांति

उमड़ते घुमड़ते प्रश्नों का ऊत्तर

इतना सरल नही था

क्योंकि वे अर्जुन का विषाद नही थे

गांधारी का पुत्र मोह भी कहाँ था उन में

तथा उस का सत्य की विजय का

आशीष भी नही थे वे

क्योंकि वे तो

प्रतिज्ञाओं की श्रंखला में आबद्ध

कृत्रिम सत्यान्वेष्ण को

ललकारने की स्वीकृति भर चाहते थे

ताकि दुःख की बदली से झर कर

निरभ्र हो जाएँ

और खून से आंसुओं की

धारा से प्लावित कर दें

उन उत्तरों को

जो बोझ की भांति

धर दिए हैं

जबर दस्ती

दहकते कलेजे पर |

16 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह वाह, अति सुन्दर और गहन
    विचारों का चयन
    पढ़, भर आया मन..
    हार्दिक अभिवादन

    • dr.ved vyathit says:

      @Vishvnand, यह सब आप का आशीर्वाद है आशीर्वाद के लिए कोई धन्यवाद थोड़ी करता है बसदिल में आभार अनुभव किया जाता है

  2. Sinner says:

    प्रतिज्ञाओं की श्रंखला में आबद्ध
    कृत्रिम सत्यान्वेष्ण को
    ललकारने की स्वीकृति भर चाहते थे
    ताकि दुःख की बदली से झर कर
    निरभ्र हो जाएँ

    ………………………..
    अद्भुत और अमूल्य शब्दों का पुनरअंवेषण
    कुछ और लिखना शायद मेरे व्यक्तिगत छमता से बहार की बात है..

    बधाइयाँ

    • dr.ved vyathit says:

      @Sinner, भाई इस तुच्छ सी रचना को आप का इतना प्यार मिला कैसे आभर व्यक्त करूं
      हार्दिक आभार स्वीकार करें

  3. siddha nath singh says:

    शास्त्रीय कविता यही होती है, बहुत खूब.

  4. rajivsrivastava says:

    kya likhu nishabd hu– badahai

    • dr.ved vyathit says:

      @rajivsrivastava, भाई राजीव रचना को मिला आप का प्यार ही सब कुछ है यह प्यार शब्दों से प्रे है मैं आप के इस प्यार को दिल से अनुभव क्र रहा हूँ

  5. ashwini kumar goswami says:

    लिखते जाओ निरंतर ही ऐसी भावात्मक रचनाएं,
    जिनके पीछे छुपी हुई हों गहन भावपूर्ण कल्पनाएँ !
    मन की पृष्ठ भूमि पर ये है प्रभावकारी काव्य लेखन,
    मस्तिक अचेतन भी होकर, इन्हें पढ़ने का करता मन !

    • dr.ved vyathit says:

      @ashwini kumar goswami, भाई अश्वनी आप का निरंतर रचना को मिलता हुआ प्यार ही मेरी रचनाओं को गति प्रदान करता रहेगा मेरी रचना को मिला आप का यह प्यार मेरे लिए बहुत कुछ है
      कृपया आभार स्वीकार करें

      • dp says:

        @dr.ved vyathit,Goswami saahab jaise senior citizen kaa pyar aur ashirvad har ek ko kaha mil pata hai sir ji. aap khush kismat hain.

        • dr.ved vyathit says:

          @dp, मैं इसे अपना सौभाग्य समझता हूँ यह सब मित्रों की शुभकामनाओं का प्रतिफल है

  6. Prem Kumar Shriwastav says:

    बहुत सुन्दर …

  7. prachi sandeep singla says:

    बहुत ही उम्दा

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