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पास फिर भी उदास….!

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Hindi Poetry

ये रचना sinner जी की सुन्दर रचना ” अब जब नहीं हो तुम मेरे पास” को पढ़ने के बाद इक sin के रूप में उभरी है, जिसे पोस्ट कर रहा हूँ क्षमा याचना के साथ…

पास फिर भी उदास….!

“अब जब नहीं होती तुम मेरे पास
बहुत हो जाता अब ये मन,
तुम्हारी याद में उदास.
घर से उठकर मैं चला जाता हूँ पास
उस ‘बार’ में जो भी है अपने घर के पास
करने तुझ पर कविता रचने का प्रयास
जो मेरे दिल की असली है प्यास “

भेजी ये पंक्तिया उसे मैके में कुरियर के साथ
चाहा कविता पर उसकी प्रतिक्रया
आये ख़ास …

बीवी ने जब पढी ये मेरी उदासी और प्यास
सब छोड़ लौट जल्द
आ गई घर मेरे पास
और छोडा है उसने अब मैके जाने का ध्यास
अब मेरी रह गयी है अधूरी कविता और प्यास

इसीलिये मैं फिर रहने लगा हूँ बेबस और उदास
अब नहीं जा पाता जहां बुझती है प्यास…. ….

” विश्वनंद “

8 Comments

  1. Sinner says:

    गुरुदेव धन्य हो गया ये SINNER

    इसकी कविता को मिल गयी एक नयी राह

    अब नहीं जा पाता जहां बुझती है प्यास…. …
    क्या जरुरत है जाने की…
    जब बारिश की बूंदे घर मे दस्तक दे रही हैं…

    धन्यवाद और आभार आप का कृति को नया रूप देने के लिये…

    • Vishvnand says:

      @Sinner
      कमेन्ट के लिए तहे दिल से शुक्रिया
      सुन्दर नयी कवितायें पढ़ अपने आप नए अंदाज़ उभर आते है
      इसीलिए p4p पर कवितायें पढ़ सब बढ़िया tonic पाते हैं …

      पहले वो पास नहीं, इसलिए उदास
      अब पास हैं, इसलिए उदास
      ये उदास का चक्कर बहुत है बदमाश ….

  2. rajiv srivastava says:

    ek pyari se guggudati kavita ke liye dhanyavad—- roj aap ki ek naye rachna jo ho paas to ye dil kabhiu na ho udaas

    • Vishvnand says:

      @rajiv srivastava
      बहुत बहुत शुक्रिया आपके कमेन्ट का ख़ास
      रहता कविता लिखने का हरदम प्रयास
      पर कविता का सूझना कहाँ रहता अपने हाथ
      वो तो सब है कविता देवी के कृपा की बात….

  3. anju singh says:

    वाह क्या बात है…
    बहुत बढ़िया …बहुत बेहतरीन सर जी…

    • Vishvnand says:

      @anju singh
      आपका इस सुन्दर प्रतिक्रया के लिए हार्दिक धन्यवाद
      उभरे जब कविता उदासी में भी हो जाता दिल ये आबाद…..

  4. P4PoetryP4Praveen says:

    दादा कविता के प्रारंभ में आपका इस प्रकार अपने प्रेरक के बारे में लिखना…बहुत ही बड़ी बात है…वरना कई रचनाकार तो रचनायें ही मूल रूप से चुराकर (मैं इस मंच की बात नहीं कर रहा हूँ) अपना नाम रख देते हैं…आपने तो स्वयं की रचना को भी समर्पित किया है…

    सचमुच आप प्रेरणा का स्रोत हैं…

    और इस मस्त करती हुई रचना के लिए बहुत-बहुत बधाई दादा… 🙂

    • Vishvnand says:

      @P4PoetryP4Praveen
      आपकी सुन्दर प्रतिक्रया ने तो मन मोह लीना
      बुझ गयी ये प्यास और भूल गया हूँ पीना …

      हार्दिक आभार

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