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प्यार भीने हुए पल गए.

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Hindi Poetry
प्यार भीने हुए पल  गए.
स्वप्न हो सारे ओझल  गए.
आग ऐसी विरह की जगी
नेह रीते नयन जल गए.
 
लौ दिए की उगलती रही
तोहमतों सी निरंतर धुआं
चाँद तारों को देती रही
जैसे मारे जलन बद्दुआ.
हो  गहन कज्जली रात में
सारे मंगल अमंगल गए.
 
स्वर्ण  मृग नित अनायास ही
मैथिली मन लुभाते रहे.
लोभ के तीव्र आवेग में
सारे संकोच जाते रहे.
राम जैसे सदाचार सब
ज्यों हटे, रावणे छल गए.
 
खोल कर केश ज्यों बदलियाँ
धूप में आ सुखाती रहीं.
लाज से शबनमी दुल्हनें
देख सूरज, लजाती रहीं.
धृष्ट किरणों के कर झील के
गाल पर रंग ज्यों मल गए.
 
चाँद ने ओढ़ चादर तो ली
झिलमिलाती सितारों जडी.
फिर भी ईर्ष्या भरी आँख है
जुगनुओं पर ही उसकी गडी .
सोच कर हो रहा है धुआं
टूट ये किसके पायल गए.
 
आप की याद के खिल उठे
मन के जल में सुनहरे कँवल
फिर हवा गुनगुनाने लगी
आ के कानों में शीरीं ग़ज़ल.
महमहाने लगा ये बदन
हम तो हो जैसे संदल गए. 
 
 

4 Comments

  1. kishan says:

    आग ऐसी विरह की जगी
    नेह रीते नयन जल गए.
    इतनी अच्छी रचना ke liye badhai ..jai shree krishna

  2. prachi sandeep singla says:

    so sweet 🙂

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