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बदले किताबे इश्क के उनवान जाने मन.

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Hindi Poetry

बदले किताबे इश्क के उनवान जाने मन.   unvaan-sheershak

रांझा ने मांगी हीर से है जान जाने मन.

 

आसूदगी-ए दिल के लिए दर्द सौ पड़े   aasudagi-santushti

तू किस खुशी की खोज में हैरान जाने मन.

 

दुनिया है इसके होते हैं दस्तूर ही अलग,

याँ दिल्लगी के सख्त हैं तावान जाने मन.     taavaan-dand

 

तू मूँद तो पलक को अभी ख़्वाब आयेंगे,

है वस्ले यार किस क़दर आसान जाने मन.

 

ठोकर पे एक ज़रा सी न हथियार डाल तू,

ऐसे तो क्या खुलें तेरे इमकान जाने मन.   imqaan-sambhavnayen

 

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत अच्छी, मर्निक और मनभावन
    बधाई …

    सब्जी के दाम प्याज से होने के पहले ही
    बिन प्याज की ही सब्जी बना अब तो जाने मन ….

  2. kishan says:

    ठोकर पे एक ज़रा सी न हथियार डाल तू,
    ऐसे तो क्या खुलें तेरे इमकान जाने मन
    वाह वाह सर मान गए आप को ..जय श्री कृष्ण

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