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मेरा तू दीपक बन जा रे ….!( Bhaktigeet)

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Hindi Poetry, Podcast

This, an old ( Yr1975) Bhaktigeet of mine emerged during midlife crisis as a fervent prayer to The Almighty to kindly be the instrument for imparting true knowledge of self & duties to the devotee and illumine the confusing difficult path of devotee’s mortal life in all its aspects.
I feel very happy to share this song here posted along with its new Podcast containing its recitation as also sung in the tune it got composed.

 

मेरा तू दीपक बन जा रे ….!

मैं कौन हूँ, क्या हूँ, मुझे क्या करना है,
कौन ये राह दिखावे …
अंधियारी ये जीवन राहें, तू दीपक बन जा रे ….
मेरा तू दीपक बन जा रे ….

ज्ञान मेरा ना ज्ञान है साँचा , मोह लोभ ने इसको फाँसा,
अंहकार के इस फंदे से, कौन जो मुझे छुडावे .
है कौन जो मुझे छुडावे …..
मेरा तू दीपक बन जा रे …..

तेरे सामने तेरा बालक, तू ही मेरा प्यारा पालक,
मात पिता सम मुझे पास ले, सब मुझको समझा रे,
तू ही सतज्ञान दिला रे …
मेरा तू दीपक बन जा रे ….

भक्त तेरा हूँ, फिर भी प्यासा, समझ न मेरे कुछ भी आता,
दरस को तेरे तरस गया हूँ, आकर दरस दिखा रे,
तू आ मेरी प्यास बुझा रे …
मेरा तू दीपक बन जा रे ….

मैं कौन हूँ क्या हूँ, मुझे क्या करना है,
कौन ये राह दिखावे …
अंधियारी ये जीवन राहें, तू दीपक बन जा रे ….
मेरा तू दीपक बन जा रे ….


” विश्व नन्द “

2 Comments

  1. Harish Chandra Lohumi says:

    आपके आश्रम की तो छटा ही निराली होती है सर !
    हमारा साष्टांग नमन !

  2. rajiv srivastava says:

    shradhayukt prernamayi rachna!!!!anand hi anand !!!!!!badahai

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