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ચાહું છું… ( प्यार है.. )

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Gujrati Poetry

…કે, જે

મૌન રહી

બોલ્યા કરે છે..

ને.. ઝાકળ પાછળ

પલળ્યા કરે છે..

એવા અજનબી ને..

હું ચાહું છું…

ખુબ ચાહું છું….

વરસતા વરસાદમાં..

ઉભા રહી..

સતત નખશિખ

પલળવું છે..

ને… પળ પળ આમજ..

પલાળ્યા કરે છે…

એવા અજનબી ને..

હું ચાહું છું…

ખુબ ચાહું છું….

-ગાર્ગી

(Note :  हिंदी पाठकों की सुविधा के लिए मूल गुजराती रचना का हिंदी अनुवाद : )

…कि जो

चुप रहकर भी सब कुछ कहता है…

ओस में छिपकर भीगता है ..

उस अजनबी से मुझे प्यार है…

बहुत प्यार है…

बरसते सावन में बाहर निकल,

बेरोक भीगते रहना है..

पल पल हरपल एसे ही…

भिगाए  जाता है…

उस अजनबी से मुझे प्यार है…

बहुत प्यार है…

10 Comments

  1. Vishvnand says:

    भावार्थ का अंदाज़
    बहुत न्यारा है
    मनभावन सा
    और प्यारा है
    बधाई …..

    • Gargi says:

      @Vishvnand,
      दादा आपकी बधाई भी काव्यात्मक रहती है..
      जो बहुत ही प्रोत्साहित करती है…
      मूल गुजराती हूँ तो लिखती भी गुजराती में ही हूँ…
      पर अब हिंदी में भी अच्छा लिखने की कोशिष कर रही हूँ…
      बस आपके मार्गदर्शन की ज़रूरत रहगी…
      बहुत-बहुत धन्यवाद…

  2. anju singh says:

    waah गार्गी ji..
    sudar पंक्ति… maafi chahti hun
    par क्या आप को wakai….. hai

  3. kishan says:

    ખરેખર બહુજ સરસ રચના સે ..

    • Gargi says:

      @kishan,

      અરે સરુ લાગ્યું ગુજરાતી કમેન્ટ વાંચીને અહીં…
      ખુબ ખુબ આભાર કિશનભાઈ તમારો…

  4. P4PoetryP4Praveen says:

    विश्वनंद दादा की बातों से सहमत हूँ…

    अच्छा किया ताकि हिंदी पाठक भी आपकी रचना को समझ सकें…और पढ़ सकें… 🙂

    बहुत अच्छी रचना…बहुत-बहुत बधाई… 🙂

  5. Kevin Doru says:

    Sister vanchi ne khubaj prabhavit thayo

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