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आप जैसा बदल न पाएंगे.

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Hindi Poetry

आप जैसा बदल न पाएंगे.

आप के साथ चल न पाएंगे.

 

तुझको जैसी रचा विधाता ने,

रच तो वैसी ग़ज़ल न पाएंगे.

 

आग के फूल हैं संभलियेगा

इनको ऐसे मसल न पाएंगे.

 

मौत हम पर अभी करम रख तू,

उनके अरमां निकल न पाएंगे.

 

मसलाये इश्क  हैं  ये  पेचीदा,

इनके आसान हल न पाएंगे.

 

दिल के मज़्मूं हैं ये हिसाब नहीं,

गिनतियों में ये ढल न पाएंगे.

 

आज हैं पास,प्यार कर लीजे

पास फिर आप कल न पाएंगे.

 

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    मनभावन शेर
    बधाई

    कट्टर मुजरिमों को बेल पर छोड़ देते
    बेवकूफी है समझना वो भाग न पायेंगे ….

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