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तुम मत समझो, ना समझा हूँ ….!

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Hindi Poetry


तुम मत समझो, ना समझा हूँ ….!

तुम मत समझो, ना समझा हूँ,
तेरी यादों के दो पहलू हैं …!

एक याद जो ख़ुद ही आती है,
मुझको बहला कर जाती है,
हर बार नया कुछ समझाकर,
दिल बाग बाग कर जाती है,
तुझको करता महसूस यूं मैं,
और मुझे सुला कर जाती है …….!

दूजी तो कुछ नटखट सी है,
ख़ुद आए नहीं, भागी सी है,
बस दूर से बातें करती है,
सुख दुःख के आंसू देती है,
जब प्यार से उसे बुलाता हूँ,
गीतों में उलझती जाती  है,
जब तक कोई गीत न बन पाये,
सोने भी ये नही देती है ……..!

मुझको अचरझ सी दोनों हैं,
प्रभु का वरदान ये दोनों हैं,
दोनों से प्यार मैं करता हूँ,
और सुख में जीवन जीता हूँ…..

तुम मत समझो, ना समझा हूँ ….!

” विश्व नन्द “

10 Comments

  1. dp says:

    वाह सर जी ……॥
    एक तेरे आने से पहले की…।
    और एक तेरे जाने के बाद वाली । 🙂

    • Vishvnand says:

      @dp,
      आप मत समझिये आपके कमेन्ट का मतलब समझा ही नहीं
      हाँ कुछ कुछ ऐसा ही है पर सबकुछ ऐसा नहीं
      पर आपके कमेन्ट की तारीफ करना ही है सही
      Thank you…

  2. rajivsrivastava says:

    bahut badiya sir!

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    बहुत मनभावन सर ! बधाई ! इन यादों का सिलसिला कुछ होता ही ऐसा है सर ! एक के बाद दूसरी चली ही आती है। 🙂

    • Vishvnand says:

      @Harish Chandra Lohumi,
      बहुत सुन्दर कमेन्ट और सच बहुत सही,
      p4poetry पर रचनाएँ पढ़
      जाग उठती है पुरानी यादें बनकर नयीं…
      कमेन्ट के लिए आपको प्रशंसा मेरी…..

  4. sushil sarna says:

    मनभावन यादों को मासूमियत से लपेटे सुंदर गीत-हार्दिक बधाई सर जी

    • Vishvnand says:

      sushil sarna,
      पुरानी भावनाओं का गीत है
      इसलिए ही शायद मासूम है
      आपके मन भाया, मुझे प्यारी खुशी है
      और आपका तहे दिल से शुक्रिया है

    • Vishvnand says:

      @sonal
      Thanks for the nice comment.
      But you can see that as of now 17 readers have viewed the poem, 5 have taken trouble to comment including you, but only 3 have done the rating, where as it is expected that more members reading the poem give their rating to the poem even if they feel there is nothing to comment or don’t have time or don’t feel like commenting..
      I would be posting a poem on the need and request to members to invariably rate every poem they read so that from the average rating the author of the poem understands how his poem stands in the opinion of the readers, and excellent & proper use is made of this rating facility meaningfully incorporated at our p4poetry site for the benefit of members with passion for poetry… …

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