« »

बात होती है सिर्फ मतलब की

2 votes, average: 4.00 out of 52 votes, average: 4.00 out of 52 votes, average: 4.00 out of 52 votes, average: 4.00 out of 52 votes, average: 4.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry
बात होती है सिर्फ मतलब की
फिक्र वरना उन्हें कहाँ सबकी.
 
छब यही दिल में उनके बस्ती है,
एक ओहदे की,एक मंसब की.
 
दास्ताँ ही तेरी ख़तम न हुई,
बज़्म तो उठ के जा चुकी कब की.
 
गुलसितां में न जी लगा इसका
मन भ्रमर को थी धुन तेरे लब की.
 
साथ देती नहीं जुबां क्या हो,
सोचता हूँ कि लिख रखूं अबकी.
 
सुन लें दुश्नाम ,सर निगूं कर लें,    दुश्नाम-गाली,निगूं-झुकाना
अपनी हालत वही मुसाहब की.
 
ये तो रोना है रोज़मर्रा का,
बात कोई नहीं ये एक शब की. 

4 Comments

  1. Harish Chandra Lohumi says:

    बहुत अच्छे एस एन साहब !
    तुम्हें गैरों से कब फ़ुर्सत, हम अपने गम से कब खाली,
    चलो बस हो चुका मिलना, न हम खाली न तुम खाली ।

    • siddha Nath Singh says:

      @Harish Chandra Lohumi, धन्यवाद, अकबर इलाहाबादी इसी को यूँ कह गए हैं-
      डिनर से तुमको कम फुर्सत इधर फाकों से कम खाली
      चलो बस हो चुका मिलना, न तुम खाली न हम खाली.

  2. Vishvnand says:

    बहुत अच्छे..
    बढिया अंदाज़

    बात क्यूँ करें सिर्फ अपने मतलब की
    फिक्र यहाँ करना है सब को सबकी ?

Leave a Reply