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सजदों को अपने कोई एक खुदा दीजिये…..

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Hindi Poetry

खामोशियों की ये दिवार अब गिरा दीजिये
लब्जों को अपने हौसलों की जुबां दीजिये

ये क्या के हर दर पर झुका रखा है सर
सजदों को अपने कोई एक खुदा दीजिये

अब तारीकियाँ टपकने लगी है उजालों से
बेनूर हुए जो चराग़ अब उन्हें बुझा दीजिये

राख में दबी चिंगारियां भी हों शायद कहीं
यूं न बेवजह बातों को आप हवा दीजिये

राहों की दूरियाँ भी सिमट ही जायंगी कभी
बस आप दिलों की दूरियाँ मिटा दीजिये

दुआएँ सबकी लौट आई है वक़्त-ए-रुखसत
देखकर आप अब बस ज़रा मुस्कुरा दीजिये

बेक़रारी तशन्गी-ए-समंदर की सुन ए खुदा
लहरों ने कहा शकील ज़रा पानी पिला दीजिये

7 Comments

  1. sushil sarna says:

    राहों की दूरियाँ भी सिमट ही जायंगी कभी
    बस आप दिलों की दूरियाँ मिटा दीजिये
    क्या बात है शकील भाई, बहुत सुंदर-इस सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई

  2. siddha nath singh says:

    बेहतरीन शायरी, बहुत खूब.

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    गज़ब की गज़ल ! मुबारकबाद !

  4. Vishvnand says:

    भई वाह शकील जी बेहतरीन शायरी और अंदाज़
    ऐसे ही आपकी ग़ज़लों और नज्मों का मज़ा हमें दीजिये
    और यूं ही p4poetry पर बार बार और जल्दी जल्दी आया कीजिए …
    Kudos

  5. amit478874 says:

    बेशक बेहतरीन…! तारीफ़ कने को अलफ़ाज़ नहीं मिल रहे..! खैर, rating के जरिये तारीफ कर देते है..! बहुत बढ़िया पंक्तियाँ…! 🙂

  6. Raj says:

    बहुत उम्दा ग़ज़ल. हर इक शेर काबिल-ए-तारीफ़.

  7. Abhishek Khare says:

    ५*, बहुत ही खूबसूरत !

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