« »

हुआ जो हस्तगत वह क्षय समझना.

3 votes, average: 4.33 out of 53 votes, average: 4.33 out of 53 votes, average: 4.33 out of 53 votes, average: 4.33 out of 53 votes, average: 4.33 out of 5
Loading...
Hindi Poetry
हुआ जो हस्तगत वह क्षय समझना.
सखे ! संसार का आशय समझना.
 
उकेरी मूर्ति कब मंदिर बनाती
है प्रभु जिस दिल में देवालय समझना.
 
अनामय है अजर है वह अजन्मा
है उससे   विश्व मायामय समझना.
 
है जिसके हाथ हीरक आस्था का
उसे हैं रत्न मणि मृण्मय, समझना.
 
उठा है स्वर मधुर जो बांसुरी से,
वो होगा फिर उसी में लय समझना.
 
पिता की जो शरण में आ गया है,
सतायेंगे उसे क्या भय, समझना.
 
वही है आप में, हममें,सभी में,
सभी का है यही परिचय समझना.
 
वही देगा वही वंचित करेगा
भला किस काम का संचय समझना.
 
जला जो दीप बुझना भी सुनिश्चित,
जो जन्मा मृत्यु उसकी तय समझना.
 
प्रकृति परमात्मा है व्यक्तरूपा,
प्रकृति है पूज्यतम अतिशय, समझना.
 
जयाजय दु:ख सुख में, लाभ क्षय में,
बनो पंडित, न अंतर है, समझना.  

7 Comments

  1. […] This post was mentioned on Twitter by Ravishankar, naradtwits. naradtwits said: हुआ जो हस्तगत वह क्षय समझना. | p4poetry http://bit.ly/hrBKil […]

  2. Vishvnand says:

    हर शेर अर्थपूर्ण और सुन्दर .
    मन भाये …

    “प्रकृति परमात्मा है व्यक्तरूपा,
    प्रकृति है पूज्यतम अतिशय, समझना.” …बहुत खूब

    प्रकृति को जो यहाँ समझे समझते
    ये खुद के बाप की है मत समझना ….. 🙂

  3. CS_Aithani says:

    बुरा न मानियेगा, आपकी हर रचना क्राउन है .

  4. ashwini kumar goswami says:

    सचमुच यह ५-सितारा लेखन है, सितारों सहित बधाई !

Leave a Reply