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****कफ़न तेरी अमानत है~!!!!!

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Hindi Poetry, March 2011 Contest

 

आंसू मेरे है
आँखे तुम्हारी अमानत है

 

जिंदगी मेरी है
साँसे तुम्हारी अमानत है

 

दिल मेरा है
धड़कन तुम्हारी अमानत है

 

इंतजार मेरा है
चाहत तुम्हारी अमानत है

 

प्यार मेरा है
दीवानापन तुम्हारी अमानत है

 

तन्हाई मेरी है
गम तुम्हारी अमानत है

 

सपनो मैं तेरी याद आती है
नींद तुम्हारी अमानत हें

 

तेरे बीन जिन्दगी राश ना आती है
तुम्हारा साथ मेरी अमानत है

 

मौत मेरी है
कफ़न तेरी अमानत है

 

खुदा को मेने मंदिर मस्जिद में ढूंढा है
वो खुदा मेने तूझ मैं पाया है

 

“किशन”

10 Comments

  1. meera trivedi says:

    nice one…[:)]

  2. Vishvnand says:

    अंदाज बहुत बढ़िया
    पर हिंदी की गल्तियाँ भी बहुत जो सब मज़ा किरकिरा कर देती हैं . बिन ऐसी गल्तियों के रचना पोस्ट करना जरूरी होता है..
    निम्न गल्तियों को कृपया एडिट कर सुधारिए…
    मैं = मे
    बीन = बिन
    राश = रास
    मेने = मैंने
    वो खुदा मेने तूझ मैं पाया है = वो ख़ुदा मैंने तुझमे पाया है

  3. sushil sarna says:

    Kishan jee, u have expressed ur feelings very nicely but some editing is required as stated by Sh.V.Anand jee-good effort,

  4. Harish Chandra Lohumi says:

    अच्छा प्रयास किशन जी, मुझे लगा कि यह रचना पहले भी पढ़ने में आयी है कभी .
    विशेषज्ञों की सलाह पर अमल करेंगे तो सुधार निश्चित है.

  5. Ruchha says:

    Bahot hi achhi peshkash he

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