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धर्म निरपेक्षता

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Hindi Poetry

नेताजी मुस्लिम जनसभा में,
अपने उदगार सुनाते हैं,
अपने को धर्म निरपेक्ष बताते हैं।
खुद को किसी धर्म से न जुडा बता,
अपना धर्म इंसानियत बताते हैं।

अगले ही दिन हिन्दू जनसभा में भी,
अपने यही विचार सुनाते है,
अपने वचन की प्रमाणिकता के लिए,
भगवान श्री राम की कसम खाते हैं।

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    सुन्दर रचना और प्रभावी कटाक्ष .
    मन भायी
    आजकल धर्मनिरपेक्षता को गलत दिशा देने की कोशिश और शिक्षा जनता को अधर्मी बना रही है

    कृपया अन्य मेम्बरों की रचानाये पढ़ उन रचनाओं को अपनी ओर से rating जरूर दीजिये और अगर चाहें तो उनपर अपने कमेन्ट भी. यही p4p पर अपना निरपेक्ष धर्म भी है ….

  2. Harish Chandra Lohumi says:

    अच्छा प्रयास ।

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