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इश्क सिक्के जैसा

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Hindi Poetry
इश्क  
१००–२००–५०० रुपये के
नोट जैसा नहीं होना चाहिए,,
 
कि पाया,,
और कब खर्च हो गया,
मालूम ही ना पड़े….
 
वो तो
ऐसा होना चाहिए जैसे
चवन्नी,,अट्ठन्नी या एक रुपये का सिक्का,,
 
जो सालों बाद भी
पुराने कपड़ों को झाड़ने भर से निकल आये,,
 
कहीं किसी कोने से
दिल के………….!!!!
 
 
 
 
 

17 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत बढ़िया अंदाज़- ए- बयाँ
    गहन, अर्थपूर्ण, मार्मिक और मनभावन
    Commends
    पर पुराने प्रेमी ही पुराने सिक्कों से प्रेम करते हैं
    नए प्रेमिओं को तो नोटों से ही प्यार है इसलिए उनका प्यार भी सिक्कों जैसा नहीं नोटों जैसा ही होता है, आता जाता नहीं भरोसा….. 🙂

    • prachi says:

      @Vishvnand, सही कहा आपने,,इस उत्कृष्ट और प्रशंसात्मक कमेन्ट के लिए हार्दिक शुक्रिया 🙂

  2. chandan says:

    बहुत सुन्दर बहुत अर्थपूर्ण! प्राची

  3. SARALA says:

    Hi Prachi

    Sundar and saral ,satyam shivam sundaram !!!!( Truth is beauty and neauty is truth )

  4. Aditya ! says:

    लाजवाब !

  5. Prem Kumar Shriwastav says:

    बहुत सुन्दर…बहुत सुन्दर…बधाई…

  6. U.M.Sahai says:

    बहुत खूब, क्या बात है, प्राची, बधाई, पर फ़िर सिक्के की तरह प्यार के भी दोनों पहलुओं पर विचार करना होगा.

  7. s.n.singh says:

    taksali bhasha aur khankhanati kavita,vimb aur prateek ka behad khoobsoorat istemaal. sundar!

  8. kshipra786 says:

    prachiji……………. is kavita ko amin pyaar ka ark kahungi.dil nichor diya yaar.no comments plz. i don’t hv words.

  9. ishu says:

    बहुत ही लाजबाब अंदाज………..

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