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गीत मत गाओ

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Hindi Poetry

गीत मत गाओ

 

गीत मत गाओ सभी कुछ ठहर जाता है

गीत मत गाओ ये दरिया बहक जाता है

गीत को सुन कर परिंदा लौट आता है

गीत को सुन कर उड़ाने भूल जाता है

रोकना चाहो समय को तुम सुरीली तन से

पर समय तो और भी कुछ दूर जाता है

दर्द में भीगे हुए फाहे रखो मत घाव पर

घाव इस से और ज्यादा गहर जाता है

ये सुरीली तन तो नश्तर चुभोती है

तन मत छेड़ो वो उड़ना भूल जाता है

जब नदी ही ठहर जाती है रवानी छोड़ कर

फिर उसे बादल संदेशा आ सुनाता है ||

 

14 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत प्यारी अभिव्यक्ति
    पढ़कर होवे मन की तृप्ति
    हार्दिक बधाई…

    गीत मत गाओ ये कहना सहज होता है
    गीत ना गाना नही मुमकिन ये होता है….

  2. rajiv srivastava says:

    aisa geet jo sab jagah dahroa la de-is umda geet ko to gana hi chahiye——bahut hi manbhavan rachna sir ji!

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    मनभावन अभिव्यक्ति .

  4. siddha Nath Singh says:

    manohari kavita parantu tan ki jagah taan hona chahiye kyon doctor shab.

    • dr.ved vyathit says:

      @siddha Nath Singh, बन्धु बहुत २ हार्दिक आभार स्वीकार करें
      आप ने ठीक कहा है पोस्ट तो मैंने तान ही किया था पर पता नही कैसे तन हो गया यह कई बार हो जाता है इसे तान ही मने

  5. parminder says:

    बहुत सुन्दर! पर शायद तन की जगह तान होना चाहिया था|

    • dr.ved vyathit says:

      @parminder, परमिन्द्र जी आप का स्नेह है यह निरंतर बना रहे
      मैंने पोस्ट तो तान ही किया था पर पता नही कैसे तन हो गया आप इसे तान ही माने
      बहुत २ हार्दिक आभार स्वीकार करें

  6. chandan says:

    बहुत सुन्दर Dr sahab

    • dr.ved vyathit says:

      @chandan, भाई आप का प्यार है यह सब और कुछ नही बीएस इसे निरंतर बनाये रहिये
      बहुत २ आभार

  7. Jaspal Kaur says:

    मनभावन रचना

    • dr.ved vyathit says:

      @Jaspal Kaur, जसपाल जी सायद आप ने पहले भी मेरी रचना को प्यार दिया है इसे निरंतर बनाये रहिये
      आप का बहुत २ हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ स्वीकार करें

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